नई दिल्ली / भारत।
प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने लगातार 6ठवीं बार लालकिले पर तिरंगा फहराया ।उन्होंने समस्त देशवासियों को 74वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।फिलहाल वे राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं।आप सभी को आज़ादी की वर्षगांठ पर शुभकामनाएं।पर याद रहे आज़ादी अभी अधूरी है,क्योंकि रावी की शपथ न पूरी है।...


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नई दिल्ली / जम्मू कश्मीर।
2010 बैच का आईएएस टॉपर कश्मीरी नौकरशाह शाह फैसल फिर से सरकार के तंत्र का हिस्सा बनने के लिए अपने बनाये राजनैतिक दल JKPM से इस्तीफा दे दिया है ।खबर यह भी आ रही है कि उसे नवनियुक्त उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का सलाहकार बनाकर वापस नौकरशाही का हिस्सा बनाया जाएगा।क्योंकि दिलचस्प यह भी है कि 2018 में इस्तीफा देने के बाद आज तक गृह मंत्रालय ने उसे स्वीकार नही किया है। परन्तु सवाल तो इस पर कई खड़े होंगे क्योंकि फैसल पर तो सर्विस रूल के उल्लंघन व कदाचरण की अनुशासनिक कार्यवाही हो चुकी है फिर आखिर उसे कैसे नौकरी में वापस लाया जा सकता है दूसरा बड़ा सवाल यह है कि फैसल की इंटिग्रिटी और लायल्टी को लेकर निर्णय कैसे किया जाएगा ? क्योंकि बुरहान वानी के समर्थन में उसने आवाज बुलंद कर्री थी तथा अपनी पार्टी खड़ी कर लिया उसके सम्बंध न जाने किन किन तत्वों से बने रहे हैं ? ऐसे में उसे वापस सरकार के तंत्र में शामिल करना खतरनाक साबित हो सकता है।खबर तो यह भी आ रही कि उसे उपराज्यपाल का सलाहकार बनाने की भी चर्चा है ,यह तो और गम्भीर बात हो सकती है।वैसे भी नए परिदृश्य में उपराज्यपाल नए हैं उन्हें वहां की जमीनी हकीकत जाननी है तो ऐसे में शाह फैसल की वापसी व उसकी राजभवन के अंदर भावी तैनाती कितना बड़ा गुल खिला सकती है यह समझ मे आने वाली बात है। इसलिए केंद्र सरकार व गृह मंत्रालय को हर कदम फूंक फूंक कर उठाना चाहिए ताकि फैसल जैसे अविश्वसनीय और अस्थिर चित्त के लोगों के सरकार में आवागमन कहीं बड़ी चूक न साबित हो।...


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नयी दिल्ली /उत्तरप्रदेश /अयोध्या।
कल पांच अगस्त को पांच सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि पर भव्य व दिव्य राममन्दिर निर्माण के लिए सुनिश्चित मुहूर्त पर भूमिपूजन सम्पन्न हुआ।भारत के प्रधानसेवक ने 29 वर्ष बाद जब वे कारसेवक के रूप में रामलला का दर्शन किये थे उसके बाद कल उन्होंने ही भारत के राष्ट्रनायक श्रीराम के जन्मस्थान पर साष्टांग दर्शन किया तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की ओर से आमंत्रित व आहूत भूमिपूजन कार्यक्रम में जजमान के रूप सम्मिलित होकर नया इतिहस्स भी रच दिया। मोदी जी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अयोध्या में हनुमान गढ़ी व रामलला के दर्शन किये तथा मन्दिर के भूमिपूजन के जजमान बने।अयोध्या समेत पूरे देश में खुशी के इस ऐतिहासिक क्षण पर दीप जलाए गए प्रकाश फैलाया गया तथा नागरिकों ने भजन पूजन व कीर्तन करके इस कार्यक्रम को अजर व अमर कर दिया।वास्तव में आज़ाद भारत के सांस्कृतिक इतिहास की सबसे बड़ी घटना है।इसे भारत के प्राचीन राष्ट्रवाद की पुनर्प्रतिष्ठा के रूप में देखा जा रहा है।जिसमे श्रीराम राष्ट्रनायक के रूप में फिर से लोकमंगल करने को स्थापित हो रहे हैं।...


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नई दिल्ली / जम्मू कश्मीर।
भाजपा नेता व पूर्व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को जम्मूकश्मीर का नया उपराज्यपाल बनाया गया है।कल रामजन्म भूमिपूजन के पावन तिथि पर और धारा 370 की समाप्ति के दिन एक वर्ष पूरा होने पर गृहमंत्रालय ने यह आदेश जारी कर दिया।इसके पहले परसों ही जम्मूकश्मीर के पूर्व उपराज्यपाल ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था। गौरतलब है कि सिन्हा जी पिछला लोकसभा चुनाव गाजीपुर से हार गए थे ,उन्हें उस चुनाव में क्षेत्र में तमाम विकास के प्रोजेक्ट पूरा करने के बावजूद जातिगत व साम्प्रदायिक समीकरण के चलते माफिया डॉन मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी से मात खानी पड़ी थी ,तभी से श्री सिन्हा का राजनैतिक कद छोटा होता दिख रहा था,परन्तु कहा जाता है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मित्रता के चलते हमेशा के लिए साइड लाइन नही माना जाना चाहिए।कल जम्मूकश्मीर जैसे राष्ट्रीय महत्व के राज्य का उपराज्यपाल बनाकर यह पुनः संदेश मिल गया है कि मोदी जी की खास टीम में मनोज सिन्हा का आज भी स्थान सुरक्षित है। अब देखना यह है कि सिन्हा जी मोदी की आशाओं पर कितने खरे उतरते हैं,क्योंकि जम्मू कश्मीर में विकास,कानून व्यवस्था और आतंकवाद से निपटने की बड़ी चुनौती उनके सामने रहेगी। वैसे यह सीधे-2 प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के लिए भी बड़ी चुनौती है कि अनु 370 की समाप्ति के बाद किस तरह से राज्य को भारत की मुख्य धारा में शामिल किया जाता है तथा जो अलगाववादी विचारधारा वहां जड़ें जमा चुकी है कैसे वह वहां केनिवासियो के अंदर भारत के प्रति राष्ट्रीय एकत्व अखंडता की भावना को मजबूत कर पाते है तथा अपनी नियुक्ति को सार्थक करते हैं।...


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सिंगापुर/नई दिल्ली/आजमगढ़।
राष्ट्रीय राजनीति में समाजवाद को बॉलीवुड और कॉरपोरेट से जोड़ने वाले सांसद अमर सिंह ने कुछ देर पहले सिंगापुर में अंतिम सांस ली। मुलायम सिंह यादव को सुब्रत राय सहारा , अमिताभ बच्चन और अनिल अंबानी से जोड़ने वाले अमर सिंह ही थे। कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति शुरू करने के बाद वे समाजवादी पार्टी से जुड़े और उसको पूंजीवादी बना दिया। दोस्ती और दुश्मनी दोनों जमकर निभाने के लिए प्रसिद्ध अमरसिंह जोड़तोड़ और असम्भव लगने वाले समीकरण बिठाने में माहिर थे। लेकिन अखिलेश यादव के ताकतवर होते ही वे सपा में अवांछित हो गए और अंततः उन नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक बन गए जिन्हें वे जमकर कोसते थे। उप्र के ठाकुरों को पहले मुलायम सिंह और फिर भाजपा से जोड़ने में उनकी बड़ी भूमिका रही। अमर सिंह मूलतः सम्पर्कों की राजनीति करते थे। उद्योग, फ़िल्म और माफिया तीनों से उनके सम्बंध चर्चित रहे। देश की हाई प्रोफाइल पार्टियों में अमर सिंह एक स्थायी मेहमान होते थे। फिल्मी आयोजनों में अगली पंक्ति में नजर आने वाले अमर सिंह ने मुलायम सिंह के गांव सैफई में दिग्गज फिल्मी कलाकारों को लाने का सिलसिला शुरू किया। विवादों से घिरे रहना उनका शौक था। अच्छा रहन - सहन और रईसी उनकी पहिचान थी। बातचीत में अत्यंत निपुण अमर सिंह शेरो शायरी में हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। आंध्र की जयाप्रदा को उप्र की मुस्लिम बहुल रामपुर सीट से लोकसभा चुनाव जितवाना उन्हीं का खेल था । किडनी की बीमारी ने उन्हें बहुत सताया लेकिन उनकी जीवटता बनी रही। जीवन के उत्तरार्ध में जयाप्रदा उनकी हमसाया बनी रहीं। अंत में अमर सिंह अपने नाम के विरुद्ध मृत्यु के गाल में समा गए । बीते छह माह से वे सिंगापुर में इलाज करवा रहे थे। जीवन भर राजनीति को उंगलियों पर नचाते रहे अमरसिंह के अंतिम कुछ वर्ष राजनीतिक विस्थापित जैसे बीते। लेकिन उन्होंने एक लंबे दौर को अपनी उपस्थिति और दांव पेंच से प्रभावित किया। कोई उन्हें पसंद करे या नापसंद किन्तु उपेक्षित नहीं कर सकता था। राजनीति को एक नई शैली से परिचित करवाने के लिए वे याद किये जाएंगे। श्रद्धांजलि। (साभार :वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र बाजपेयी की फेसबुक पोस्ट )...


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