नई दिल्ली।
कल लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण की समाप्ति पर सभी चैनलो ने अपने-2 सर्वे दिखाते हुए मोदी सरकार के वापसी के रूझानो को दर्शाया है। ऐसा लगता है कि मोदी सरकार के उज्ज्वला,इज्जतघर,और आवास तथा आयुष्मान व किसान सहायता योजना का जबरदस्त लाभ भाजपा को इन चुनावो मे होने जा रहा है। यह भी रूझानो के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा व राष्ट्रवाद का मुद्दा भी विपक्ष के अन्य सभी मुद्दो पर भारी पङा है।इसके चलते भाजपा रिकार्ड जीत की ओर अग्रसर हो रही है।और देश मे क्या अमीर व क्या गरीब,क्या शहर व क्या गांव सर्वत्र मोदी ब्रांड का डंका बजा है।लोगो को मोदी मे दृढ,विजनरी और ईमानदार नेता की छवि का विश्वास बढचढकर चुनावो के परिणामो को प्रभावित कर गया है।इसीलिए तो भाजपा समर्थको मे उत्फाह ही उत्साह है वे तो आज ही सरकार बनने को पक्का मान रहे है तथा कह रहे है कि मोदी है तो मुमकिन है। यदि वालतव मे तेईस मई को परिणाम ऐसे ही आते है तो साफ है कि देश ने मोदी को एक और पारी खेलने का पूरा मौका दिया है,लेकिन अपेक्षाए भी वैसी ही ऊंची होंगी।तो खरा उतरना भी बहुत आसान नही होगा।लेकिन फिर भी इतना तो साफ लगता है कि देश हिंदूवादी राष्ट्रवादी ताकतो के साथ खङा हो गया है और सबका साथ सबका विकास का नारा सुपरहिट साबित हुआ है।क्योकि बिना सभी वर्गो के समर्थन के भाजपा इतनी बङी भावी विजय के फाथ वेपसी नही कर सकती।बाकी आगे जो परिणाम आए।फिलहाल तो नमो नमो का दौर आगे बढता नजर आ रहा है।...


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लखनऊ।
(बृजनंदन) लखनऊ, 03 मई । उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चित कांग्रेस के गढ़ रायबरेली संसदीय क्षेत्र में इस बार सोनिया गांधी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। चार लोकसभा चुनावों से लगातार इस सीट से अजेय रहीं सोनिया गांधी की डगर इस बार भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह से कड़ी चुनौती मिलने की वजह से मुश्किल लग रही है। गांधी परिवार के करीबी रहे दिनेश प्रताप सिंह ऐन चुनाव के वक्त कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये थे। रायबरेली लोकसभा सीट पर अभी तक कुल 16 बार लोकसभा आम चुनाव और दो बार लोकसभा उपचुनाव हुए हैं। इनमें से 15 बार कांग्रेस को जीत मिली है, जबकि एक बार भारतीय लोकदल और दो बार यहां से भाजपा की जीत हो चुकी है। 2004 में सोनिया गांधी यहां से चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। तब से वह लगातार रायबरेली से जीतती आ रही हैं। इस सीट पर 2014 की मोदी लहर में भी बीजेपी का 'कमल' नहीं खिल सका था। उम्मीदवार लोकबंधु राजनारायण ने उन्हें 55 हजार 202 मतों से हराया था। इस हार के बाद इंदिरा गांधी ने फिर कभी रायबरेली से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। यहां कभी नहीं खुला सपा-बसपा का खाता रायबरेली संसदीय सीट पर सपा-बसपा का कभी खाता नहीं खुल पाया है। सपा अक्सर यहां से अपना उम्मीदवार ही नहीं उतारती है। इस बार भी सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद रायबरेली से उम्मीदवार नहीं उतारा गया है। रायबरेली में तीन चुनावों को छोड़कर हमेशा कांग्रेस उम्मीदवार की ही जीत हुई है। वह भी तब जब यहां से 'गांधी परिवार' के किसी सदस्य ने चुनाव नहीं लड़ा। सोनिया को हराना आसान नहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शुचि विश्वास श्रीवास्तव ने 'हिन्दुस्थान समाचार' से बातचीत में कहा कि मैं रायबरेली में ही प्रियंका गांधी के साथ हूं। सोनिया गांधी को यहां से हराना आसान नहीं है। रायबरेली और अमेठी दोनों सीट कांग्रेस भारी अंतर से जीत रही है। शुचि विश्वास ने कहा कि रायबरेली में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काफी काम हुआ है। यह सीट गांधी परिवार से जुड़ी होने के कारण जानबूझकर यहां 50 से अधिक विकास योजनाओं का कार्य रोका गया ताकि जनता को असुविधा हो। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता चन्द्र भूषण पाण्डेय ने कहा कि इस बार रायबरेली में सोनिया गांधी की हार तय है। रायबरेली की जनता ने इंदिरा गांधी को भी हराया था। इस बार सोनिया को भी हराने का मन रायबरेली की जनता बना चुकी है। कांग्रेस कार्यकर्ता विहीन हो चुकी है। कुछ मुट्टीभर चाटुकारों के सहारे चुनाव नहीं जीते जा सकते। कांग्रेस की कुटिल चालों का पर्दाफाश हो चुका है। अबकी बार जनता इनके बहकावे में नहीं आने वाली है।...


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वाराणसी।
बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर का वाराणसी से नामांकन रद्द होने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि जब वे लोग (भाजपा) राष्ट्रवाद के नाम पर वोट मांगते हैं तो उन लोगों को एक सैनिक का सामना भी करना चाहिए। जिन लोगों ने उन्हें (तेज बहादुर) खराब खाने की शिकायत को लेकर नौकरी से निकाल दिया उन्हें कैसे सच्चा देशभक्त कह सकते है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव का पर्चा खारिज हो गया है। निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए दो नोटिसों का जवाब देने बुधवार 11 बजे तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ आरओ से मिलने पहुंचे, लेकिन उनके नामांकन पत्र को खारिज कर दिया गया। नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मेरा नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया है। मैं इस ज्यादती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन रद्द करने के लिए सरकार की तरफ से डीएम पर दबाव बनाया गया। 11 बजे तक मैं अपना स्पष्टीकरण जमा करने गया और मेरा नामांकन यह कहकर रद्द कर दिया गया कि मैैंने 11 बजे तक अपने साक्ष्य जमा नहीं कराए। ये तानाशाही रवैया है। नामांकन पत्र के नोटिस का जवाब देने के दौरान तेज बहादुर के समर्थकों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई। लेकिन पुलिस ने तेज बहादुर के समर्थकों को कचहरी परिसर से बाहर कर दिया। अब शालिनी यादव सपा की तरफ से चुनावी मैदान में मोदी को टक्कर देंगी।...


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उत्तरप्रदेश/वाराणसी।
प्रधानमंत्री के खिलाफ काशी के चुनावी रण को रोचक बनाने मैदान मे आए गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व सैनिक तेगबहादुर यादव का नामांकन ही खारिज होने की आशंका हो गयी है।नामांकन पत्र मे तेगबहादुर यादव को अनुशासनहीनता मे सेना से निकाले जाने व सजा पाने तथा जेल मे रहने का मामला चुनाव आयोग के नियमो के तहत उन्हें चुनाव लगने से अयोग्य कर सकता है।ऐसे मे मोदी के सामने गठबंधन के प्र्त्याशी के हट हो जाने का खतरा पैदा हो सकता है।आयोग ने तुजबहादुर से कल तक जवाब मांगा है।इस खबर से राजनैतिक सरगर्मी तेज हो गयी है कि मोदी के लिए काशी का चुनाव अब मात्र औपचारिकता बन के रह जाएगा अथवा देखना होगा कि कोई उन्हे चुनौती देने के लिए मजबूती से सामने आता है ।...


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लखनऊ।
सुलतानपुर : बेटा के खिलाफ लड़ा था चुनाव, मां के समर्थन में मांग रहे वोट पिछली बार वरूण के साथ रहे चंद्रभद्र इस बार बसपा से लड़ रहे चुनाव और बसपा के कद्दावर नेता पवन मेनका के साथ-साथ जा रहे जनसभाओं में पवन अब भी हैं बसपा के सदस्य ( उपेन्द्रनाथ राय) लखनऊ,। पिछले लोक सभा चुनाव में वरूण गांधी के खिलाफ बसपा से चुनाव लड़ चुके पवन पांडेय इस बार मेनका गांधी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जबकि अब भी वे बसपा में ही बने हुए हैं। इसके बावजूद न तो भाजपा को कोई आपत्ति है और न ही गठबंधन में शामिल ने अभी तक कोई कार्रवाई की है। पवन पांडेय ने अपने समर्थकों को बुलाकर पहले विधिवत महागठबंधन उम्मीदवार के विरोध करने की घोषणा की। इसके बाद मेनका गांधी की जगह-जगह होने वाली नुक्कड् सभाओं में शामिल होने लगे। यह भी दिलचस्प है कि जो पिछली बार वरूण के साथ थे वे इस बार उनकी ही माता के खिलाफ महागठबंधन से चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा नेता पवन पांडेय ने कि हम अब भी बसपा में हैं लेकिन हम किसी अपराधी का चुनाव प्रचार नहीं कर सकते हैं। इस कारण हमने विकास का रास्ता चुना है और मेनका गांधी का चुनाव प्रचार में साथ दे रहे हैं। यह बता दें कि महागठबंधन से सुलतानपुर में बसपा ने चंद्रभद्र सिंह ऊर्फ सोनू सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। उन पर व उनके छोटे भाई यशभद्र सिंह ऊर्फ मोनू सिंह पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये दोनों भाई पिछली बार वरूण गांधी के साथ थे और हर चुनावी सभा में साथ रहते थे। वरूण गांधी ने चुनाव के बाद सुलतापुर विधानसभा का अपना प्रतिनिधि भी चंद्रभद्र को बनाया था। भाजपा के स्थानीय नेताओं के अनुसार वरूण गांधी ने चंद्रभद्र को भाजपा से विधानसभा का टिकट दिलवाने का आश्वासन दिया था लेकिन विधानसभा के टिकट बंटवारे में उनकी नहीं चली। सुलतानपुर में अपनी कर्मभूमि बना चुके अकबरपुर के पवन पांडेय की अदावत चंद्रभद्र सिंह से बहुत पुरानी है। दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते। ऐसे में पहले तो पवन पांडेय अपने घर पर बैठे रहे लेकिन कुछ दिन पूर्व उन्होंने समर्थकों की एक बैठक बुलाई और मेनका गांधी का समर्थन करने का फैसला ले लिया। इसके बाद से वहां का चुनाव प्रचार भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे दिलचस्प बात है कि पवन पांडेय पिछले दो सप्ताह से बगावत कर चुके हैं और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसके बावजूद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल का कहना है कि उनके विपक्षी नेता के चुनाव प्रचार करने के सम्बंध में उन्हें जानकारी नहीं है।...


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