नई दिल्ली/लखनऊ ।
स्वामी विवेकानंद का दरिद्र नारायण दीनदयाल का अंत्योदय बन गया। आदि शंकर का अद्वैत वेदांत दीनदयाल का एकात्म मानववाद हो गया। आजादी की लङाई का आंदोलन स्वदेशी व स्वराज्य दीनदयाल का विकेन्द्रित मध्यम लघु कुटीर उद्योग आधारित आर्थिक दर्शन बन गया। गांधी जी ने हिंद स्वराज्य मे राम-राज्य की जिस अवधारणा को सोचा था-और अंतिम आदमी की चिंता की थी।परंतु उसे ढीलेढाले ट्रस्टीशिप सिद्धांत बीच छोङ दिए थे। दीनदयाल उसे वास्तविक मुकाम तक पहुंचाते है और भारतीय परिवेश मे अर्थव्यवस्था का स्वदेशीकरण व विकेंद्रीकरण की बात करते है। जो न पूंजीवाद हो न समाजवाद आधारित हो बल्कि मनुष्य आधारित हो। दीनदयाल का चिंतन मूलतः राजनैतिक दर्शन था जो आर्थिक समस्याओ के मानवीय तरीको से सुलझाने पर केंद्रित था। यही नही दीन दयाल लोहिया के सामाजिक न्याय को भी अपनी समझ से सदियो से वंचित लोगो को सशक्त व अधिकार देकर मुख्यधारा मे लाने की बात करते थे।उनका सोचना था कि हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से जुङा है जैसे की शरीर के सारे अंगप्रत्यंग एकदूजे पर आश्रित है-कहीं चोट या कमजोरी आती है तो पूरा शरीर प्रभावित व परेशान होता है। इसलिए दीनदयाल सबकी उन्नति खासकर आम भारतीय की सर्वांगीण उन्नति की बात सोचते है।और सांस्कृतिक तथा अध्यात्मिकता के साथ मनुष्यमात्र की एकता व सामाजिक समरसता उनके दर्शन को खांटी भारतीय बनाती है। इसतरह से वे अपने पूर्ववर्ती भारतीय चिंतको व महापुरूषो की जीवन दृष्टि को आत्मसात करते हुए आजादी बाद गांधीवाद व कम्युनिज्म के असफलता से राजनीति के क्षेत्र मे उभरे वैक्यूम को स्वदेशी व विकेंद्रीकृत राजनैतिक-आर्थिक-नैतिक चिंतन से पूर्ण करने का प्रयास करते है।और संघर्ष तथा केंद्रीय सत्तावाद की जगह समरसतापूर्ण विकेन्द्रित राजव्यवस्था का राजनैतिक विकल्प भी प्रस्तुत करते है। जिसके फलस्वरूप वे औद्योगिकक्रांति के बाईप्रोडक्ट के रूप मे जन्मे पूंजीवाद व समाजवाद दोनो यूरोपियन विचारधाराओं के उलट देशी दृष्टि वाली सनातनी आध्यात्मिकता से ओतप्रोत स्वदेशी आर्थिक राजनैतिक विचारधारा का श्रीगणेश करने मे सफल होते है। आज वही विचारधारा स्वीकृत होकर राजनैतिक शक्ति बनकर भारत भाग्य विधाता बन चुकी है।ऐसे महापुरूष को नमन।उन्हे जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि ।...


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नयी दिल्ली/लखनऊ ।
भाषा का सवाल सिर्फ़ भाषा का सवाल नही है ,सबसे पहले यह सवाल संस्कृति का है ।जब संस्कृति नष्ट होती है तो उसके साथ रहन सहन ,वेश भूषा ,बोलचाल ,भाषा और लिपि ,भोजन ,अचार -विचार ,लोक संस्कृति ,साहित्य और समाज सब ख़तरे में पड़ जाते हैं । भारत में अंग्रेज़ी राज से आज़ादी भले मिली लेकिन अंग्रेज़ीयत पूरी तरह नेहरु इंडिया की सबसे मज़बूत स्तम्भ बनी ,नेहरु राज और उसके बाद भी अंग्रेज़ी भाषा ने जिस क़दर भारत के विकसित व माडर्न बनते समाज को अपना ग़ुलाम बनाया वह कितना त्रासद है यह स्कूल -विश्विद्यालयो -शोध संस्थान ,अस्पताल ,बैंक ,मॉल,हवाई यात्राओं ,होटल ,सरकारी संस्थानो ,सेना ,न्यायपालिका में बहुतांश में अंग्रेज़ी भाषा के बर्चस्व और अंग्रेज़ी संस्कृति के शासन को देखकर कोई भी जान सकता है। और कितना भी हिंदी दिवस मना लें ,विश्व हिन्दी सम्मेलन व फ़ेस्टिवल कर लें -अंग्रेज़ी भाषा की ग़ुलामी बढ़ेगी ही ,मुक्ति तो सोचिए ही मत। दक्षिण भारत हो या उत्तर पसचिम पूर्व का भारत अंग्रेज़ी को १९९०के पहले नौकरशाही ने और उसके बाद आर्थिक उदारीकरण से आए वैश्वीकरण व बाजारवाद ने घर-२ को और नित नयी होती पीढ़ी में इनबिल्ट कर दिया है। इसकी जकड़ में सिर्फ़ हिंदी नहीं बल्कि एक-२ करके सभी भारतीय बोलियाँव भाषाएँ ग़ायब होती नज़र आएँगी।क्योंकि यह हमला सिर्फ़ एक भाषा पर नहीं पूरी भारतीय संस्कृति व समाज पर है-जब विकास के पश्चिमी मॉडल से भारतीय संस्कृति ही नही बचेगी तो भारतीय भाषाओं को एक-२करके मरना ही होगा।कल संस्कृत मरी तो आज तमिल भी मर रही परसों कन्नड़ व मलयालम तो आगे मराठी गुजराती भी इस महामारी से बच न सकेंगी। इसलिए भाषा का सवाल बड़ा तोहै पर संस्कृति का सवाल उससे भी बड़ा और प्रासंगिक है।इसलिये सभ्यता-संस्कृति को बचाइए।यदि संस्कृति बची रही तो भाषा भी बच जाएगी।...


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लखनऊ।
हम लोग कुछ चीजें पचा नहीं पाते .. क्योंकि जानकारी ही सीमित है .. कारण है कि कभी जानने की कोशिश नहीं की .. परन्तु जब सामने आता है तो "मैं नहीं जानता, इसको बताओ .." ये आसान सी बात को दम्भ बोलने ही नहीं देता ... . लगभग 9 - 10 वर्ष पूर्व जर्मनी से लौटते समय दिल्ली से लखनऊ की अगले सुबह की फ्लाइट की जगह शाम को ही ट्रैन पकड़ के घर आने का सोचा .. नई दिल्ली आये तो सौभाग्य से सहरसा गरीब रथ के 3AC में जगह मिल गया .. थोड़ी देर बाद ट्रैन चली तो लोग बात करने लगे .. बातों बातों में हमने बताया कि जर्मनी से वापस आ रहे है तो जाहिर है कि कई बिंदुओं पर बात हुई .. उन्होंने मेरा काम पुछा तो संक्षिप्त में मैंने बताया कि फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स क्या होता है और कैसे बिजली बना सकते हैं .. Alternate Energy पे रिसर्च का थोड़ा बताया ... कुछ वहां समय के सदुपयोग और हर चीज़ समय पर होने के बारे में बताया ... इसके कुछ समय बाद वहीं नॉएडा ग़ज़ियाबाद के चपडगंजु टाइप इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के कॉलेज के छात्रों ने मेरे हर बात का मज़ाक उड़ाना चालू किया ... इन कॉलेज से पढ़े लड़के जो ढंग से Ohm's Law को अप्लाई नहीं कर सकते, Kirchhoff's Current और Voltage Law दूर की बात है ... उनके बिंदु थे ".. जर्मनी से दिल्ली का पैसा है लेकिन दिल्ली से लखनऊ का फ्लाइट का पैसा नहीं है हा हा हा हा ..." .. ".. मेरी चादर जिसमे से 220V बिजली निकलती है वो निकालूँ या 440 वाली हा हा हा हा ..." .. "... देख के बताओ कि क्या जूता निकालने का समय हो गया हा हा हा हा ..." .. " .. करवट लेने का समय हो गया और कितने एंगल पर लेना है हा हा हा हा ..." ... आदि आदि ... आम तौर पे ऐसे मूर्खों के बातों की मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं करता .. क्योंकि मेरा मानना है "... Your Idiotic thinking is your problem or your happiness, not mine .. " . कुछ दिन पहले किसी ने एक अच्छा यूट्यूब वीडियो इनबॉक्स किया, उसको देखने के बाद अगला वीडियो किसी ध्रुव राठी का था .. उस वीडियो को देखा .. वीडियो में जो मूर्खता की पराकाष्ठा थी उससे ज्यादा अचंभित था उसके 13 मिलियन views से जिसमे से 80% like थे और 20% unlike थे .. नींचे उसके समर्थन में हिन्दू मान्यताओं का मज़ाक उड़ाते हुए कमेंट थे .. वीडियो था गोमूत्र से सम्बन्ध में .. कभी कहा जाता था ".. कटे पे पेशाब कर दो .." पेशाब में phenol होता है जो हीलिंग करता हैं, पुराने जमाने में लोग छोटे खरोच, कटे आदि पर पेशाब कर देते थे जिसका फिनॉल हीलिंग कर देता था .... इस ध्रुव राठी के वीडियो में मानव मूत्र और गोमूत्र को एक समान बता के वो कह रहा था जिसको गोमूत्र पीना हो वो उसका पेशाब पी ले .... इस वीडियो में पक्ष में जिन्होंने like और कमेंट किया था वो मूर्ख तो थे ही लेकिन unlike और पक्ष में कमेंट वालों के पास इस बात के धार्मिक मान्यता के अलावा कोई तर्क नहीं था ... क्योंकि उन्होंने अपनी बात रखने को कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं रखे थे .. जबकि वैज्ञानिक तथ्य उपलब्ध हैं ... . CSIR - CIMAP के पूर्व निदेशक Dr. SPS Khanuja ने गोमूत्र पर काफी अनुसन्धान किया और पाया कि इसमें न सिर्फ फिनॉल है बल्कि एंटीबायोटिक और एंटीफंगल भी है .. इसके अलावा कई अन्य फायदे भी है .. इस शोध को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नामी शोध पत्रों ने न सिर्फ प्रकाशित किया बल्कि उन्होंने उसका US पेटेंट भी लिया जिसका पेटेंट नंबर है US 6410059B1 दिनांक 25 जून, 2002 .. इस शोध को यहाँ पढ़ सकते हैं https://patentimages.storage.googleapis.com/5e/a5/21/4627f13c4833e0/US6410059.pdf .. इसके अलावा गोमूत्र पर कई अनुसन्धान हुए है जो कि अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रों जैसे Journal of Intercultural Ethnopharmacology (JIE), NCBI USA, US National Library of Medicine, National Institute of Health आदि में न सिर्फ प्रकाशित हुए बल्कि शोध के परिणामों को पुनः स्थापित भी किया गया .. इस सबमे गोमूत्र को Antibiotic, antifungal, antineoplastic, bioenhancer, Bos indicus, immune-enhancer माना गया ... एक अन्य जानकारी है कि भारत के शान्तिप्रिय समुदाय के साथ अन्य सेक्युलर प्रजातियाँ जहाँ गोमूत्र से जुडी धारणाओं का मज़ाक उड़ाती है, उन पर Scroll, Quint और Wire जैसे पोर्टल कटाक्ष लिखते हैं वहीँ कई अरब देशों में भारत के वैज्ञानिक गोविंदराजन सत्तानाथन और सौरमनिक्कम वेंकटलक्ष्मी के शोध "Cow Urine Distillate as an Ecosafe and Economical Feed Additive for Enhancing Growth, Food Utilization and Survival Rate in Rohu, Labeo rohita (Hamilton)" को अपने मछलियों के लिए इस्तेमाल करते हैं .... यहाँ तक कि पाकिस्तान में भी ... .. खैर आगे बढ़ते हैं ... . प्रधानमंत्री मोदी के सीवर से कुकिंग गैस बना के उस पर चाय बनाने वाले मामले पर लोग खूब उछाल मार रहे हैं .. कल की हमारी पोस्ट पर भी कई लोग आए थे और उनको सिर्फ व्यंग्य और मज़ाक सूझ रहा था ... कारण वही था कि जानकारी नहीं .. तो भारत का golden rule कि चूँकि हमको मालूम नहीं तो आप को जो मालूम वो मेरे ठेंगे पर .... मामला है सीवर से गैस निकालने और उसको जला के चाय बनाना और यहाँ तक कि बिजली बनाना भी है .... . एक है NTDTV - New Tang Dynasty Television, USA में जिसने भारत के मध्य प्रदेश में स्थित एक गाँव कोदीपुरा का दौरा किया था 2010 में ही जिसका विश्व प्रसारण उन्होंने किया था .. यहाँ इस गाँव में लोग sewage को इस्तेमाल करके गैस निकाल रहे थे जिससे वो बिजली बनाते थे और साथ में खाना बनाने का गैस भी .. ये भारत का NDTV नहीं है जो कि कोई काम का बात नहीं देता ... https://www.youtube.com/watch?v=SOBrV2-w1Ts . चेन्नई के ताम्बरम में Sewer से कुकिंग गैस 2013 में ही बनाई गई थी जिसका इस्तेमाल हो रहा है .. https://www.thehindu.com/news/cities/chennai/in-selaiyur-methane-from-sewage-becomes-cooking-gas/article4815131.ece . खैर किसी भी चीज़ को साबित करने के लिए गोरे लोगों का तड़का न लगे तो कोई भी चीज साबित नहीं होती .. तो जर्मनी में एक है University of Stuttgart जहाँ पर वैज्ञानिकों ने Sewer से निकलने वाली गैस जो की मीथेन ही होती है उसका इस्तेमाल cooking में करने का प्रयोग किया और उसको साबित किया .. और ये आज की नहीं 1981 का ही शोध है .. https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/0361365881900163 . विश्व की सबसे प्रख्यात शोध पत्र प्रकाशित करने वाली Journal है "Nature" अगर किसी वैज्ञानिक का शोध इसमें प्रकाशित होता है तो वो धन्य समझता है खुद को .. Germany में एक है Karlsruhe Institute of Technology जिसमे sewage से बायोगैस बना के उसको Audi कारों को चलाने, बिजली बनाने से लेकर घर में खाना बनाने तक का प्रयोग को प्रकाशित किया गया था ... Nature ने इसको April 2013 के अंक में छापा है ... . भारत के central Pollution control board (CPCB) ने बैंगलोर में इसका प्रयोग किया और 2006 में ही इसके इस्तेमाल करने के लिए रिपोर्ट दे दिया था लेकिन ये भारत है, यहाँ रिपोर्ट धुल फाँकती है और जनता बकैती पेलती है ... . इस पर एक सफल काम जर्मनी के वैज्ञानिक ने किया है और उन्होंने नाइजीरिया में एक कंपनी को सीवर से गैस बनाने और सप्लाई करने का पूरी तकनीकी प्रदान किया है ... अगर आप में से किसी को जानना हो और काम करना हो तो नीचे लिखे व्यक्ति से पूरी जानकारी लें और अपने दिमाग को शान्ति प्रदान करें .. Dr. Michael E. Onyenma E-Mail: michael.o@avenamlink.com . 2012 में तमिलनाडु के राजेंद्रन ने इनको सम्पर्क करके पूरी जानकारी ली थी और इसको स्थापित भी किया है ... . बाकी आगे लोग जैसा विचार करें ......


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नई दिल्ली।
मेक इन इंडिया एक महत्वाकांक्षी प्रयास है .. बड़े कारखाने जैसे सैमसंग, अल्स्टॉम, लॉकहीड मार्टिन या फिर अन्य लग रही है उसमे दिक्कत नहीं .. लेकिन जब तक MSME मजबूत नहीं होगा इकॉनमी मजबूत नहीं हो सकती .. दिल्ली, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, बंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद तो ठीक है .. ये शहर और बड़े होते जाएंगे लेकिन क्या होगा लखनऊ, बनारस, जबलपुर, रांची, कटक, गोरखपुर, समस्तीपुर, तिनसुकिया, सिल्चर या इन जैसे अन्य 2, 3, 4 कैटेगरी के शहरों या कस्बों का ... इन जगहों पर बड़ी कंपनी का आना मुश्किल .. आएं तो किसके बूते क्योंकि इधर MSME के नाम पर कुछ भी नहीं ... . पिछले 2 वर्षों से अपने प्रोडक्ट्स बनाने के दिशा में काम करना चालू किया .. 3 बार से मार्किट लांच की डेडलाइन बढ़ती जा रही है अक्टूबर 2017, मार्च 2018 और फिर जुलाई 2018 लेकिन अभी भी समय नहीं आया इसके पीछे के कारण बहुत से हैं ..लखनऊ कानपूर में कोई ढंग की मेटल और प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है, PCB बनता नहीं, मशीन का कबिनेट बनाने के लिए दिल्ली जाइए और दिल्ली तथा आस पास वाले चालू काम करके दुन्ना पैसा वसूलने के लिए मशहूर .. आगे बढ़िए अहमदाबद या मुंबई जाइए ... इनके पास लोकल इतना काम है कि UP - बिहार से आया हर आदमी भइया है .. चालू काम करके टरकाने के फेर में लगे रहते हैं ... और खर्चा भी ज्यादा जिससे लागत बढ़ जाती है और माल महंगा हो गया .. क्या फायदा ? अभी मुंबई और बड़ोदा के दो कम्पनी से फुल पेमेंट करके सामान मंगा रहा हूँ लेकिन मार्च माह से कुछ न कुछ करके समय आगे बढ़ा रहे या फिर शार्ट शिपमेंट किए और बचा माल अभी तक नहीं भेज पाए ... अब सब इकठ्ठा को तो जोड़ जाड के कैसे देखा जाए कि अपना सामान ठीक बना या नहीं ...2 साल से वहीँ जहाँ शुरू किये लेकिन पैसे खर्च हो लिए औकात से बाहर .. . कारण में से एक Product continuity बड़ी समस्या है .. कोई भी एक प्रोडक्ट स्टैण्डर्ड का नहीं .. एक का पार्ट दुसरे में फिट नहीं होता .. उदाहरण पावर प्लग देखिए ... एक बड़ा ब्रांड है Anchor लेकिन अक्सर खोलने पर अंदर के पेंच गायब रहते हैं ... एक Three Plug top दुसरे socket में नहीं लगता ..कोई ढीला इतना कि स्पार्किंग का खतरा या फिर टाइट इतना कि एक दो माह में पूरा बोर्ड उखड़ के बाहर .. यहीं यूरोप, अमेरिका या चीन का आया सामान में continuity और repeat-ability देखिए कितना शानदार होता है ... ऐसा नहीं की हम भी नहीं बना सकते लेकिन वही lack of professionalism and Wisdom की समस्या है... अब अगर आपके सप्लायर के प्रोडक्ट में continuity और repeat-ability नहीं तो वही आपका भी गत होना है ...आपका प्रोडक्ट चालू बाजार में तो चल जाएगा लेकिन कम्पटीशन में फेल हो जाएगा और आप चित्त हो जाएंगे . ट्रांसपोर्टेशन महा भयंकर समस्या है .. पैसा देकर Blue Dart, TCI से ट्रांसपोर्ट करिए चाहे सस्ते कैरियर से करिए लेकिन आपका सामान टूटा हुआ ही मिलेगा 50% .. आप लाख Handle With Care, Glass Inside, छाता का निशान बना लें आपका डब्बा उलटा ही मिलेगा .. किसी ट्रांसपोर्टर के यहाँ सामान उठाने उतारने को प्रोफेशनल स्टाफ और गैजेट नहीं है ... उनक एक ही तरीका - उठाना और फेंकना अपना क्या जाता है अगले के नुक्सान से हमें क्या .. पूरी तरह से आवारा टाइप हरकत ... अपना कल ही Rs.115000 का सामान पूरी तरह टूटा पहुंचा है, समझ नहीं आ रहा क्या किया जाए .. सब बेकार है .. लोहे का कबाड़ बन गया ... बीमा कराओ तो भी कोई फायदा नहीं .. सामान पहुँचने के 3 दिन के भीतर इंस्पेक्शन कराओ नहीं तो भागो .. अब 3 दिन में कहीं पहुँचने की टिकट मिल नहीं सकती भारत में .. पूर्वोत्तर हो तो और भी बुरा हाल .. एक माह से पहले टिकट नहीं मिलेगी .. Safe transportation is big problem in India . समस्या है प्रोफेशनल और स्किल्ड लोग .. इन लोगों को मालूम ही नहीं कि कैसे समय रहते काम पूरा करना है .. short shipment कैसे बड़ी परेशानियां खड़ी करता है ये सोचने की शक्ति ही नहीं है ..ट्रासंपोर्ट, रेल या कूरियर टूटा सामान पहुंचाना मतलब आपने किसी का लाखों का नुक्सान कर दिया और वो शायद इस वजह से बर्बाद हो सकता है...इन सबके सामने रोज ही ऐसे केस आते हैं लेकिन कोई असर नहीं .. वही सब चलता है वाला attitude चलते जा रहा है .. . बेरोजगारों की लम्बी भींड़ है देश में लेकिन इस भींड़ में ढंग का वेल्डर, फिटर, लोडर, ट्रांसपोर्ट करने का तरीका जाने वाला, सोल्डरिंग करने वाला, पैकिंग करने वाला, यहाँ तक की स्टॉक तक गिनने और एंट्री करने वाला इस लाइन में मौजूद नहीं है ... बड़ी बड़ी डिग्री है लेकिन साइन करने के आवला कोई काम करने की दक्षता मौजूद नहीं ... ढंग का प्रोफेशनल नहीं होने से कहीं भी किसी भी शहर या कस्बे में MSME का हब नहीं तैयार हो पा रहा .. जब तक MSME का हब तैयार नहीं होता तब तक बड़े कारखाने कस्बो की तरह नहीं आते और तब तक न पलायन रुकेगा और न ही बेरोजगारों की लम्बी भींड़ में कोई कमी आएगी ... डिग्री लेकर लखनऊ, पटना, दिल्ली आके कुछ वर्ष सरकारी नौकरी की तैयारी करना और लाखों की भींड में कुछ हज़ार नौकरी में से एक नहीं पाने के बाद सिस्टम को कोसते हुए कहीं अन्यत्र पलायन करना या फिर वापस आने गाँव देहात में frustrate होकर सारी जिन्दगी कुढ़ते हुए गुजारना ... . समय रहते ही इन भींड़ को दक्ष कर्मगार बनना होगा नहीं तो ये भींड़ बढ़ती जाएगी ... इस विस्फोट को रोकने के लिए समाज को खुद जागरूक और सिस्टम को इस अनुरूप बनना होगा .......


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इलाहाबाद-प्रयागराज।
पोर्न और दारू है मुख्य कारण किशोरों व नाबालिगों मे बढती यौन पिपासा का। जब मोदी सरकार पोर्न साइट्स पर बैन लगा रही थी तो सेकुलर गैंग सङक पर आ गया था। दारू तो खैर गली-2 मे बिक रही है सभी सरकारें बेच रही हैं। कक्षा आठ से ही कांवेंटिए बीयर पीकर डीयर खोजने लगे हैं तो निम्न आय वर्ग के नवकिशोर लङके फोर्जी मोबाइल मे पोर्न विडियो चलाते हुए टैंपो चालक,पंचर मास्टर और दुकान पर नौकरी कर रहे हैं। इन सबके पास रोज दारू पीने के पैसे कहीं न कहीं से आ जाते है-या सङक व मूर्तियो को तोङकर सींक सरिया बेचकर स्मैक व गांजा पीने की लत भी शहरी गरीब युवाओ मे पङ चुकी है। कुछ वर्षो से देख रहा हूं दो वर्ग ही खास तौर पर यौन हमले मे लिप्त मिल रहा है-पहला बीयर पीकर डीयर खोजते लङके दूसरे दारू गांजा पीकर निम्न वर्ग के किशोर ! ए दोनो ही एंड्रायड फोर जी के ग्राहक हैं कोई सस्ता तीन हजारी मोबाइल तो कोई मंहगा दस हजारी एंड्रायड यूजर है। इन दोनों वर्ग के किशोरो नाबालिगो ने पिछले पांच वर्षो मे लगातार यौन अपराधो को बढा दिया है और मेट्रो सिटीज से लेकर छोटे नगरो मे भी ऐसे कांड लगातार हो रहे हैं। यदि आप अपने समाज को इस सच्चाई से रूबरू नही कराते है तो आप हमेशा हर घटना के बाद एकदूसरे पर कीचङ फेंकते नजर आएंगे-कैंडल जलाएंगे -कैंडल मार्च मे भी यही बीयर वाले डीयर शिकार खोजते मिल जाएंगे। सबसे जरूरी है किशोरो व युवाओ को नशे व पोर्न से बचाएं।वरना पूरा का पूरा समाज ही चरित्रहीन ,लंपट और यौनपिपासा मे डूबता जाएगा,यौन हमले बढते जाएंगे।आप सोचेंगे देश मे आधुनिकता बढ रही है इसलिए रेप ठीक नही गलत है शर्मनाक है निंदनीय है ,लेकिन आप कभी नही समझ पाएंगे रेप,यौन हमले ,पारिवारिक हिंसा के बीज आधुनिकता की परतों के नीचे पल रहे हैं क्योकि यह जिसे आप आधुनिकता समझ व फैला रहे है वास्तव मे यह पश्चिमीकरण है या उपभोक्तावादी बाजार बना रहे है हम अपने समाज को जहां हर चीज बिकती है-जिसके पास माल होगा वह सबकुछ खरीद लेगा और जिसके पास मालनही होगा तो वह क्या करेगा ? कभी सोचिएगा पैसा न होने से बङे -2 माल के सामने से गुजरते उन लोगो के मन मे कितनी कुंठा होती होगी । माल का मतलब जितना भी आपका समाज समझता है उन सबको सोचिए फिर प समझ जाएंगे कि नशा और पोर्न कल्पना मे सबको मालदार बनाने का सपना दिखाते है और अपराध के लिए अबेट करते है दुष्परेरित करते हैं।इसे रोकना होगा तभी यह सब रूकेगा।वरना तो रोज बढ रहा है।...


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