New delhi।
स्वामी जी नौ भाई बहन थे,एक जो उनसे बङे थे ,वो आठ महीने की आयु मे ही एक्सपायर कर गये थे।फिर तीसरी संतान के रूप मे उनकी बहन आयी ,वह भी ढाई साल के शैशव काल मे ही चल बसी।फिर आयीं हरमानी,वो भी आगे सिर्फ 21 वर्ष की आयु पायीं थी।चौथी संतान फिर बहन स्वर्णमयी जो 72 वर्ष तक जीवन यापन की।और स्वामी जी की पांचवी भी सहोदरा ही जन्मी वह सिर्फ छ वर्ष तक जीवित रह सकी। उसके बाद छठीं संतान के रूप मे स्वयं स्वामी जी विले नाम लेकर आए।सातवीं संतान किरणबाला थी,जो दुर्भाग्य से 18 वर्ष की होकर चली गयी।आठवीं थी जोगेन्द्रबाला और फिर आये दोनो छोटे भाई 9वे व दसवें महेन्द्रनाथ और भूपेंद्रनाथ।जो क्रमशः87 एवं 81 वर्ष की पूर्णायु प्राप्त किये। स्वामी जी उन्तालीस वर्ष पांच माह 22 दिन की आयु तक रहे और उनकी माता श्री भुवनेश्वरी देवी 9 वर्ष आगे 1911 मे 70 वर्ष की आयु तक जीवित रहीं। कम लोगो को पता होगा कि स्वामी जी आजीवन अपनी मां व भाई बहनो के लिए चिंतित रहे,उनके लिए कुछ खास न कर पाने के लिए परेशान रहे।इस संदर्भ मे स्वयं स्वामी जी ने जाने के कुछ वक्त पूर्व ही लिखा था कि "मै एक अक्षम पुत्र हूं,मै इस योग्य नही हो पाया कि अपनी मां के लिए कुछ कर सकूं।मैने उन्हे वैसे ही हाल पर छोङ दिया।" हालांकि कुछ महीने पहले ही उन्होने वापस केस जीतकर अपना पुश्तैनी घर मां को दिलवादिया था।और उनके लिए आजीवन खेतङी नरेश के यहां से अनुदान की व्यवस्था भी हो ही गयी थी-अनेक शिष्य,बहन व गुरूभाई भी मां के लिए उपस्थित रहते थे।भूपेंद्र नाथ दत्ता तो आजादी की लङाई मे क्रांतिकारी बन गये। यह स्वामी जी का आम पारिवारिक व साधारण स्नेही व भावुक इंसान वाला चेहरा है जिसे अक्सर इस महान युवा आइकान का मूल्यांकन या चर्चा के वक्त ध्यान मे नही लिया जाता है। हमे इसे भी जानना चाहिए।समग्र व्यक्तित्व समग्र प्रभाव देता है।...


Leave a comment

New delhi।
स्वामी जी का आज जन्मदिन है ।आज उनकी १५५ वें जयंती है । स्वामी जी के जन्मदिवस को १९८४ से राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है । स्वामी विवेकानंद ने आध्यात्मिक संदेश देते हुए दुनिया भर के युवाओं को मनुष्य जाति के उन्नत भावों और उदात्त आदर्शों को जीने के लिए प्रेरित किया । उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में भारत के युवा हृदय में तो मानो सर्वतोमुखी आज़ादी स्वतंत्रता और मुक्ति का तूफ़ान पैदा कर दिया जो भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के रूप में दुनिया व देश के सामने आया । दुनिया में हिंदू संस्क्रित और भारतीय अध्यात्म का झंडा गाड़ते हुए उन्होंने कहा गर्व से कहो हम हिंदू हैं । सदियों से पददलित और निराश हीनभाव से ग्रस्त हिंदू चेतना को उन्होंने यह कहकर झकझोर दिया -उठो जागो और जब तक लक्ष्य न मिले तब तक रुको मत । स्वामी जी ने प्राचीन भारत और आधुनिक भारत को जोड़ दिया ।वे उस सांस्कृतिक राजमार्ग का निर्माण कर गए जिस पर चलकर हिंदुत्व सनातन और राष्ट्रवाद की नींव पड़ी । इस तरह से आज हम उनके चिर ऋणी हैं उन्हें शत शत नमन ! वे सदा सदा हमारे हृदयों में रहेंगे ।...


Leave a comment