राष्ट्रनिर्माता सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप मे मनाने की बधाई।शत शत नमन।-श्रीनिवास शंकर,सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी भाजपा(लीगल)।भारत मां की यशस्वी संतान,स्वयंसेवक,एकात्म मानववाद के जनक तथा भारतीय जनता पार्टी के आदिपुरूष -संस्थापक पं दीन दयाल जी को जयंत्ती पर शत-2 नमन।समस्त राष्ट्रवादी बंधुओ को शुभकामनाएँ हार्दिक बधाई-श्रीनिवास शंकर,इलाहाबाद ,राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भाजपा(कानूनी एवं विधिक विभाग) भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री हम सबके श्रद्धेय स्व.अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर पूरा देश दुखी है।शोक मे डूब गया है।महान नेता बहुमुखी प्रतिभा के धनी हम सबके प्रेरणा स्रोत अटल जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि-शत-2 नमन      

इंदौर/नयी दिल्ली   38
मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजकल मैं इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में छपी एक खबर ऐसी है कि जिस पर पूरे देश का ध्यान जाना चाहिए। केंद्र सरकार का भी और प्रांतीय सरकारों का भी। चिकित्सा के क्षेत्र में यह क्रांतिकारी कदम है। पिछले 50 साल से देश के नेताओं और डाॅक्टरों से मैं आग्रह कर रहा हूं कि मेडिकल की पढ़ाई आप हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में शुरु करें। ताकि उसके कई फायदे देश को एक साथ हों। एक तो पढ़ाई के आसान होने से डाॅक्टरों की संख्या बढ़ेगी। गांव-गांव तक रोगियों का इलाज हो सकेगा। दूसरा, इलाज के नाम पर अंग्रेजी के जादू-टोने से जो ठगी होती है, वह रुकेगी। तीसरा, दवाइयों के दामों में जो लूट-पाट मचती है, वह रुकेगी। हिंदी में नुस्खे लिखे जाएंगे तो वे मरीज के भी पल्ले पड़ेंगे। चौथा, स्वभाषा में पढ़ाई होने पर छात्रों की मौलिकता में वृद्धि होती है। यदि वे अनुसंधान अपनी भाषा में करेंगे तो भारत में पैदा होनेवाले रोगों का मौलिक इलाज़ ढूंढ सकेंगे। विदेशों पर होनेवाली उनकी पूर्ण निर्भरता घटेगी। इन सब बुनियादी कामों की शुरुआत अब मध्यप्रदेश में हो रही है। यहां की मेडिकल युनिवर्सिटी के बोर्ड आॅफ स्टडीज ने फैसला कर लिया है कि सभी चिकित्सा परीक्षाएं अब हिंदी में भी होंगी। मेरी बधाई ! ऐसी अनुमति देनेवाली दिल्ली की मेडिकल कौंसिल को भी धन्यवाद ! और सबसे ज्यादा आभार, धन्यवाद और बधाई भारत के स्वास्थ्य मंत्री जगतप्रकाश नड्ढा को, जिनसे इस मामले में बराबर मेरी बात होती रही और जिन्होंने लगभग दो माह पहले ही मुझसे कहा था कि अब मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में ही नहीं, कई भारतीय भाषाओं में शुरु होने ही वाली है। यह मप्र में सबसे पहले शुरु हुई है, इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज चौहान भी बधाई के पात्र हैं। मप्र के डाॅक्टर बंधुओं से मेरा निवेदन है कि वे मेडिकल की हिंदी पाठ्य-पुस्तकें जल्दी से जल्दी तैयार करें ताकि मप्र चिकित्सा-क्रांति का अग्रदूत बन सके। ...


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