अलीगढ़/उत्तरप्रदेश   141
#अनहाइजनिक_और_मोटीसंवेदना AMU के कुछ छात्रों (सोमवीर व अन्य )ने आरोप लगाया है कि सरसैयद अहमद साउथ हाल में चलने वाली कैंटीन में शाकाहारी खाना उसी बचे तेल में पकाकर छात्रों को खिलाया जा रहा है जिस तेल में नानवेज पकाया जाता है ।विवि प्रशासन को लिखे पत्र में छात्रों ने ज़िम्मेदार लोगों पर कार्यवाही की माँग की है।परंतु विवि प्रशासन बिना जाँच पड़ताल के ही आरोपों को ख़ारिज कर रहा है। आइए AMU कैंटीन की बुरी हालत पर ख़ुद मैं अपनी आखों देखी बताता हूँ।२००९-१० की बात है निजी कार्य से मैं दो हप्ते के अलीगढ़ प्रवास पर था।तो ख़ाली होते कहीं कुछ देखने की इच्छा पूरी करलेता था।तो एक-दो दिन AMU भी गया।कैंपस का भव्य प्रवेश द्वार और साफ़सुथरी सड़क -बढ़िया स्थापत्य और हरियाली के दृश्य अच्छे लगे।पूरा घूमते हुए सड़क से आर पार हो आए।फिर मन किया कैंटीन दिखी और चाय की तलब जगी। तो कैंटीन बिल्डिंग में घुस गया।हाल में पहुँचते ही नानवेज की गंध का ज़ोर का भभका नथुनों से टकराया।निगाहे घुमायी तो दो तीन बड़े कड़ाहों के पास छात्रों की भीड़ थी ,तीव्र गंध से लगा यहाँ तो छोटका-बड़का ही मिलेगा।पर पता चला की वेज भी है,चावल बिरयानी,समोसा पकौड और चाय ले सकते हैं ख़ैर चाय समोसे के लिए टोकन लिया और एक मेज़ की ओर उसने इशारा की वहाँ मिलेगा तो पहुँच कर समोसा चटनी के साथ प्लेट में ले तो लिया पर वहाँ के कप में चाय लेने की हिम्मत नही हुयी क्योंकि ननवेज मसाले की तीखी गंध नाक को बींधे जा रही थी -निगाहें हाल में हर मेज़ व हाथ में प्लेट ले निपटाते छात्रों पर थी ,फ़र्श पर गिरा पड़ा भी काफ़ी फैला था,तो मैंने फ़ाइवर ग्लास में चाय लिया और हाल के बाहर फूल पेड़ वाले खुले एरिया में जहाँ लोहे की कुर्सियाँ व बेंचेज बने हुए थे ,काफ़ी बच्चे उधर भी बैठकर नाश्ता गपशप कर रहे थे,मैं भी एक कुर्सी पर बैठ चाय पीने लगा।भाई साहब जैसा कि मुझे अंदेशा था समोसे में से भी नॉनवेज की गंध चाय के कप में भी वही गंध बस चटनी व चाय के टेस्ट में ग़नीमत थी।कहने का मतलब यह कि वहाँ अधिकांश छात्र नॉनवेज ही निपटा रहे थे और समोसे छोले वाले कम थे तथा चाय वाले तो ना के ही बराबर थे -जो लोग मटन या जो भी बिरयानी कड़ाहे से निकाल कर दे रहे थे वही लोग वेज वीरयानी व छोले भी दे रहे थे ..छोले व बिरयानी के तो कलछुले भी मुझे एक ही दिखे ।मुझे चाय देने वाला भी महक रहा था और यही मेरा पवाइंट है की कम से कम शाकाहारियों के लिए उनका कोई अलग से ध्यान नही था ।सिर्फ़ मांसाहार व उसको खाने वाले के हिसाब से पूरी व्यवस्था थी तभी तो समोसा व चाय भी उन्ही हाथों से दी जा रही थी । तो यह उनकी समझ के बाहर की बात थी की शाकाहारी लोगों को इससे दिक्कत होती होगी।वे बिलकुल बेपरवाह थे मस्त होकर कैंटीन को गड़ही में मछरी मारने की तरह बना रखे थे। हाँ पर सस्ती सामान दे रहे थे ,और व्यवहार सामान्यतह ठीक था ।मुद्दा यह है कि अभी जब छात्र सोमविर ने नॉनवेज के बचे तेल में पूरी छनकर खिलाने की शिकायत की तो वह भी इसी का प्रमाण है की शाकाहरीयों के लिए वहाँ कोई केयर नही है।शायद इसलिए भी ऐसा हो की अधिकतर बच्चे-लोग वहाँ मुस्लिम हैं-जो अमूमन नॉनवेज खाने वाले अधिक हैं।और शाकाहारी नॉनमुस्लिम ही होते होंगे,जो AMU में अल्पसंख्यक ही हैं।तो उनकी चिंता क्या करना ? बाक़ी मुस्लिम कम्यूनिटी में हाईजीन को लेकर समझ कम है इसमें कोई दो राय नहीं है। तो छात्रों के आरोपों पर आँख बंद करने से अच्छा होगा की AMU अपनी व्यवस्था में सुधार करे।उसे हाईजैनिक व बिना भेदभाव के सबके लिए संवेदनशील बनाए। ...


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