नई दिल्ली/उत्तरप्रदेश   81
#शायराबानो को भी जाने... इनका #बिबाह_इलाहाबाद में हुआ था और ये अक्टूबर 2015 में अपने मायके उत्तराखंड गयी हुई थी और इनके पति ने #पत्र से #तलाक दे दिया,इनके दो बच्चे थे एक बारह साल का और एक चौदह साल का....इनके पति ने इनको अपने बच्चों से भी मिलने से वंचित कर दिया।शायराबनो इन परिस्थितियों से हार नही मानी और इस लड़ाई को शुरू की,इनकी इस लड़ाई में कई मुस्लिम महिला संगठनों ने इनका सहयोग किया।यद्यपि कि इसके पहले #शमीमआरा का मामला भी 2002 में आया था जिसमे ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक घोषित किया जा चुका था,किन्तु ये जजमेंट सर्कुलेट नही हो पाया था...फिलहाल शायराबानो के मामले में वकील श्रीनिवासन ने #पहली_बार ट्रिपल तलाक को #मूल_अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर #चैलेंज किया था,इसके अतिरिक्त #हलाला_बहुबिबाह को भी इस केस में #चैलेंज किया गया था....#मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस याचिका का विरोध कर रहा था.... #शायराबानो हिम्मत से लड़ी और एक जबरजस्त जीत हासिल करके अपने साथ साथ सभी महिलाओं को भी न्याय दिलाया....इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने #हलाला और #बहुबिबाह पर तो कुछ नही बोला लेकिन #ट्रिपल_तलाक को #असंवैधानिक_घोषित कर दिया और सरकार को छह माह में कानून बनाने का निर्देश दिया लेकिन अफसोस सियासी नफा-नुकसान की राजनीति के वजह से कानून बनने में अड़चनें आती रही लेकिन अंततः कल ट्रिपल तलाक पर बना कानून अपना सफलता से मात्र एक कदम दूर रह गया है,उम्मीद है कि वह भी चरण पार कर जाएगा और शायराबानो की लड़ाई का बेहतरीन प्रतिफल मिलेगा...…।। ट्रिपल तलाक पर माननीय उच्चतम न्यायालय,सरकार और #शायराबानो_को_बधाई । ...


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