नई दिल्ली/जयपुर   95
# आज की जरूरत है हंसता हुआ धर्म धर्म और भाषा को लेकर लिखा गया आदरणीय चिंतक भगवान सिंह जी का एक स्टेटस पढ़ा। उसके बाद उस पर आए विचार पढ़े। मैं किसी और लोक में चला गया। अनेकानेक विचार मस्तिष्क में तैरने लगे। मैं चुपचाप अपनी वाल पर लौटा और अपने विचार लिख डाले। आचार्य विनोवा भावे की एक किताब है - 'कुरआन सार'। इसकी भूमिका में वे लिखते हैं कि इसे पढ़ते हुए उनके नेत्र धुंधले हो जाते थे, इसलिए कि आंखें भर आती थीं। वे आयतें पढ़-पढ़ कर घंटों अश्रु विमोचन करते रहते थे। फिर कई प्रकार के प्रयत्न के बाद उसे पढ़ते और अनुवाद कार्य आगे बढ़ाते। और इससे ज्यादा विस्मयकारी यह है कि आचार्य विनोबा भावे ने अपनी पुस्तक में गिनी-चुनी आयतें ही रखी हैं। उन्होंने सम्पूर्ण पर क्यों नहीं लिखा, यह मैं आज तक समझ नहीं सका। मैंने कुरआन को तीन भाषाओँ में पढ़ा - हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी। कुरआन, शरिया और अहादिस की व्याख्या करते हुए मौलानाओं के अनेकानेक वीडियो देखे। मुझे प्रभावित किया सिर्फ आस्ट्रेलिया के 'इमाम ऑव पीस' मौलाना तौहीदी ने अथवा अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक़ ने। ये दोनों मुस्लिम विद्वान मुझे तर्कसंगत बातें करते दिखे हैं। शेष जोकर ही लगे हैं, जिन्हें न इल्म है, न इल्हाम। बस, भीड़ को धकेल रहे हैं एक ऐसे गड्ढे की तरफ जिसमें अल्लाहतआला की बताई कोई चीज़ नहीं है। बस, इनके स्वार्थ भरे हैं। ठीक यही हाल ईसाइयत का है। उसके पास तमाम हिंदू प्रतीक चुरा कर स्वयं को श्रेष्ठ बताने की सीनाजोरी के अलावा कुछ नहीं है। सच कहूं, तो मुझे कुरआन या बाइबल पढ़ते हुए कभी कोई ऎसी अनुभूति नहीं हुई, जैसी रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र पढ़ते या सुनते हुए होती है अथवा टीना टर्नर द्वारा गाया 'सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु ...' सुनते हुए। स्नातम कौर की गाई नानकवाणी मेरा रोम-रोम खड़ा कर देती है। उनके स्वर में गुरु ग्रंथ साहब के भजन मुझे रुला देते हैं। उनका गाया 'मूल मंत्र' सुनते हुए मैं अभिभूत हो जाता हूं। मूजी संगीत कभी आपने सुना है? 'शिव शिव शिव शम्भो' सुनिए। सच, आप ठीक उस तरह थिरकने लगेंगे, जैसे मैं बैठे-बैठे आंखें बरसाते हुए थिरकता हूं। मुस्कराते हुए आंसू बहाने की कला भी सीख लेंगे। क्या आपने कभी नीना हेगल को सुना है - 'जय माता काली, जय दुर्गे' गाते हुए? क्या आपने 'श्री राधा माधव, श्री कुंजबिहारी' उच्चारते देवा प्रेमल का साक्षात किया है? कीजिए। एक बार मेरे कहने से करें, फिर आपका स्व नियंत्रण। सी सी व्हाइट का 'सोल कीर्तन' सुनिए। उनके सुर में 'हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा' के साथ थिरकने से आपको संसार की कोई शक्ति नहीं रोक सकती। और ठीक यही ताकत उनके गाए 'द मा चैंट', 'राधे राधे' और 'रामायण आनंद' में है। पीएम नरेंद्र मोदी जब दूसरी बार रूस यात्रा पर गए थे, तब उनके एक कार्यक्रम में एक रूसी महिला कलाकार ने वैदिक ऋचाओं का सुमधुर गायन किया था। दुर्भाग्य मैं उसे सेव नहीं कर सका। जहां मिले सुनें। बहुत सारे हैं, कहां तक लिखूं। ओशो ने लिखा है - आज एक जीवंत धर्म की आवश्यकता है। मुस्कराते, खिलखिलाते, हंसते हुए धर्म की। एक ऐसे धर्म की, जो समाज को आनंदमय करता है, उसे बेड़ियों में नहीं जकड़ता। सोचता हूं - केवल सनातन ही ऐसा धर्म है। जीता-जागता। थिरकता। हंसता-मुस्कराता। खुशियां बिखेरता। सभी को स्वीकार करता, गले लगाता। विपरीत विचार को नकारता, किंतु आचार्य कह कर सम्मानित भी करता और अपने संग्रह में स्थान देता। पश्चिम की युवा पीढ़ी रेग्गे, पॉप, रॉक आदि पर थिरकती है। भारत की युवा पीढ़ी भी इसमें पीछे नहीं है। लेकिन सनातन के लिए जैसी दीवानगी वहां है, यहां की युवा पीढ़ी में उसका लेशमात्र नहीं है। मेरा स्वप्न है - काश, मैं सनातन की यह वैश्विक शक्ति भारत भूमि पर यहां की नई पीढ़ी के समक्ष कभी साक्षात उतार सकूं। इन सभी कलाकारों को बस, एक बार भारत भूमि पर इकट्ठा कर सकूं। परमात्मा मुझे यह शक्ति दे, यही प्रार्थना है। आओ, कहें - सदा विजयी हो सत्य, जो सनातन है। 🙏 ...


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