नई दिल्ली   162
दक्षिणपंथियों की यही सबसे बड़ी दिक्कत है कि वो अपने वास्तविक मसलों को भी नहीं उठा पाते, वहीं जिनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है वे 40-50 लोग भी झूठी बातों को इतना फैला देते हैं कि सभी जगह उसी पर चर्चा होने लग जाती है। ओवैसी जैसा एक नंबर का मुस्लिम कट्टरपंथी अकेला होते हुए भी अपने समाज के झूठे, सच्चे सभी मसले संसद में उठा लेता है, फिर क्या वजह है कि दक्षिणपंथी BJP की 303 सांसद हिंदुओं के एक भी मुद्दे को संसद में नहीं उठा पाते। वो कौन सी बुनियादी दिक्कत है जो ऐसा नहीं हो पा रहा है। इसी तरह दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन होने का दावा करने वाला RSS भी वास्तविक मुद्दों को उठा पाने में बहुत पीछे है। RSS के संबद्ध कई ऐसे संगठन हैं जिन्हें हिंदुओं की आवाज़ उठाने के लिए बनाया गया था, ऐसा लगता है वे भी अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं। बदली हुई परिस्थितियों में ये संगठन खुद को अपडेट नहीं कर पाए हैं। तभी तो ताकत होने के बावजूद मुद्दों में उबाल नहीं ला पाते। पिछले 4-5 सालों में हिंदुओं को बदनाम करने के सैकड़ों कामयाब बड़े प्रयास किए गए, कहीं भी ये मोर्चे पर मजबूती से खड़े नहीं दिखे। इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश कीजिए- दिल्ली के भोगल में एक मुसलमान ने सरे बाज़ार एक हिंदू लड़की को चाकुओं से गोदकर मार डाला, स्थानीय बहादुर लोगों ने उसे किसी तरह काबू करके पुलिस के हवाले कर दिया। काबू करने के दौरान उस जेहादी की ठीक-ठाक ठुकाई कर दी गई, शुरू में मीडिया ने इसे भी मुसलमान की मॉब लिंचिंग नाम देने की पूरी कोशिश की। अब इस मुद्दे को संसद के चलते हुए भी बीजेपी के एक सांसद ने भी नहीं उठाया। तो ऐसे फिर ऐसे में इन 303 ऐसे लोगों की हिंदुओं के लिए कोई उपयोगिता बचती है? आप ये सोचकर देखो दिल्ली के भोगल की घटना में अगर लड़की मुसलमान होती और लड़का हिंदू होता तो क्या भारत का राजनीतिक वातावरण ऐसे ही शांत बना रहता? तब क्या मीडिया ऐसे ही एक सिरफिरे आशिक जैसे टाइटल से न्यूज़ चलाता? ये मैंने सिर्फ बात समझने के लिए एक मिसाल दी है, घटनाएं तो न जाने कितनी हो रही हैं, हो रही हैं। 5 साल में BJP बुरी तरह नाकाम रही है बड़े मुद्दों को उठाने में। हिदुओं को बदनाम करने की बात तो छोड़ो, BJP तो अपने मारे जा रहे कार्यकर्ताओं का मुद्दा भी नहीं उठा पा रही है। वहीं ममता ने हिंदुओं को बदनाम करने के लिए 49 बिकाऊ खरीद ही लिए। अब बात करते हैं मेरे जैसे साइबर सिपाहियों की, जिन्होंने कई बार हालात को पलटकर रख दिया है, वो भी बिना किसी आधिकारिक ताक़त के, याद है न क़ुरान बांटने वाला कोर्ट का फैसला, वो फैसला केवल सायबर वर्ल्ड पर चले आक्रामक अभियान की वजह से कोर्ट को मजबूर होकर वापस लेना पड़ा। क्या वजह है ? हमें मिलकर मंथन करने की जरूरत है। BJP प्रतिनिधियों को भी अहंकार के सातवें आसमान पर खुद को जाने से रोकना होगा। ...


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