नयी दिल्ली / महाराष्ट्र   89
साभार अविनाश त्रिपाठी जी दो दिन पहले मैंने जीवन में पहली बार समुद्र देखा। किनारे से खड़े होकर देखने में समुद्र जितना खूबसूरत लगता है अंदर से उतना ही भयानक, तब आपका जहाज ही आपकी जमीन है और एक बार वो छूट गया तो पूरा समुद्र ही आपका कब्रिस्तान फिर भी एक आदमी है जिसने जानते बूझते बीच समुद्र में अपने जहाज से छलांग लगा दी, बिना किनारे तक पहुंचने की परवाह किए। ये 8 जुलाई 1910 था जब ब्रिटिश जहाज मोरिया फ्रांस के मार्सेल बंदरगाह पहुंचने वाला था। तब सख्त निगरानी में भारत ले जाए जा रहे 27 साल के सावरकर ने जहाज से छलांग लगा दी। लिखने वालों ने इसकी तुलना छत्रपति शिवाजी के औरंगजेब के कैद से निकल कर भागने से की। शौच के बहाने अंग्रेज पुलिस को चकमा देकर सावरकर बीच समुद्र में कूद गए। अंग्रेज पुलिस ने जहाज से उनपर गोलियां चलानी शुरू कर दी। बाद में नाव से उनका पीछा किया गया। कुछ घंटे तैरकर आखिरकार सावरकर को फ्रांस का किनारा मिल गया। कई असफल प्रयास करने के बाद 9 फीट ऊंची चट्टान चढ़कर सावरकर फ्रांस की जमीन पर थे। उन्होंने मौका पाते ही खुद को फ्रंच पुलिस के जवान को सौंप दिया लेकिन उनके पीछा करते हुए पहुंची ब्रिटिश पुलिस के दबाव में आकर फ्रंच सिपाही ने उन्हें वापस अंग्रेज पुलिस के हवाले कर दिया। इधर सावरकर भारत पहुंचे उधर उनकी गिरफ्तारी को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस की सरकार हेग के इंटरनेशनल कोर्ट पहुंच गई। फ्रांस को इस केस में हार का मुंह देखना पड़ा। फ्रंच प्रधानमंत्री की विपक्ष ने जमकर लानत-मलातन की लेकिन किसी गुलाम भारतीय के लिए फ्रंच सरकार ज्यादा दर्द लेती भी क्यों। जिस कोर्ट में सावरकर को 50 साल काला पानी की सजा हुई उस कोर्ट में सावरकर को अपने पक्ष में बोलने तक का अधिकार नहीं था। बिना आरोपी का पक्ष जाने ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 50 साल के लिए कालापानी भेज दिया। यूरोप के बर्फीले पानी में अपने जहाज से कूदने वाले सावरकर को वीर लिखने पर आज मजाक बनाया जाता है अंग्रेजों की गोलियां से बचते हुए सागर पार करने वाले सावरकर की दया याचिकाओं पर सवाल किया जाता है। अपनी वर्दी पर D (dangerous)का बिल्ला टांगे काला पानी के अंदर 6-6 महीनों के लिए Solitary confinement (जेल के अंदर जेल) पाने वाले सावरकर को अंग्रेजों का दलाल कहा जाता है और ये उस देश की कहानी है जिसके राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को Boer War में अंग्रेज सरकार की वफादारी के लिए gold medal for loyalty और केसरी हिन्द की उपाधी दी गई और दो दिन पहले राहुल गांधी ने दिल्ली में अपना धरना इसलिए दो घंटे पहले समाप्त कर दिया क्योंकि ठंड बहुत थी या फेनमिषें हससि निर्दया कैसा का वचन भंगिसी ऐसा त्वत्स्वामित्वा सांप्रत जी मिरवीते भिनि का आंग्लभूमीते मन्मातेला अबला म्हणुनि फसवीसी मज विवासनाते देशी तरि आंग्लभूमी भयभीता रे अबला न माझि ही माता रे कथिल हे अगस्तिस आता रे जो आचमनी एक क्षणी तुज प्याला ॥ सागरा प्राण तळमळला You are laughing at me (in the form of the foam in your waves), but why did you break your promise of taking me back to my mother ? You have always claimed to be strong, but you are in fact afraid of the British rule. You try to call my mother weak and coward, but it applies to you. My mother is not weak, Agasthi, one of her sons had swallowed you in an instant (from the story of Agasthi Rishi) Take an oath that even if I get the throne of ‘Deity Indra’, I will decline the same and die as the last Hindu !’ Vinayak Damodar Savarkar ...


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