नयी दिल्ली/लखनऊ   215
सेवा में माननीय योगी आदित्यनाथ जी, मुख्यमंत्री – उत्तर प्रदेश सरकार,लखनऊ विषय : संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कवि – सम्मेलनों से वैचारिक प्रदूषण महोदय, उत्तर प्रदेश का संस्कृति मंत्रालय समय – समय पर कवि – सम्मेलनों का आयोजन करता आ रहा है | कवि – सम्मलेन, समाज के वैचारिक एवं चारित्रिक निर्माण का एक सशक्त माध्यम हैं | आपकी सरकार बनने के बाद से ही इस माध्यम द्वारा परोसे जाने वाले वैचारिक आहार की गुणवत्ता में अतिशय सुधार की आशा थी जो कि दुर्भाग्यवश नहीं हुई | संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कवि – सम्मेलन भारतीय संस्कृति का पोषण तो दूर; भारतीय संस्कृति, राष्ट्रधर्म एवं राष्ट्रवाद का क्षरण करने वालों को संरक्षण देने का मंच बन चुके हैं | जहाँ, समय – समय पर देशद्रोही जेहादी मानसिकता वाले शायरों को ससम्मान आमंत्रित किया जाता रहा है | अभी हाल ही में पूज्य अटल जी के जन्मोत्सव के अवसर पर, २५ दिसंबर को संगीत नाटक अकादमी के सभागार में संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कवि- सम्मेलन में घुसपैठियों की वकालत करने वाली उग्र और कट्टर मानसिकता की शायरा लता “हया” को आमंत्रित किया गया था | हम स्वयंसेवकों एवं सोशल मीडिया के राष्ट्रवादियों के भारी विरोध के पश्चात ही माननीय मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी जी के हस्तक्षेप द्वारा ही उनका आमंत्रण निरस्त हो सका था | उग्रता और साम्प्रदायिक मानसिकता के राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा जैसे अन्य शायरों जिनके शेरों को उद्धृत करके आम जनमानस को सोशल मीडिया पर दिग्भ्रमित करने की बहस चलाई जाती है, को भी संस्कृति मंत्रालय अपने कार्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा लगातार बनाता रहा है | अतः स्पष्ट है कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कवि सम्मेलनों से भारतीय संस्कृति और विचारधारा का पोषण नहीं अपितु क्षरण ही हो रहा है | आदरणीय, इन सबके मूल में इन सभी कार्यकर्मो के प्रत्यक्ष/ परोक्ष संयोजक सर्वेश अस्थाना जी की महती भूमिका रही है | जो स्वयं तथाकथित समाजवादी विचारधारा के घनघोर समर्थक रहे हैं | २५ दिसंबर को आयोजित हुए कवि – सम्मेलन में इन्होने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “ध्वज प्रणाम” पर भी स्तरहीन एवं अभद्रतापूर्ण मसखरी की थी | उस पूरे कार्यक्रम में अटल जी के विचार मंच से पूर्णतया नदारद थे | यदि वैचारिक युद्ध में सेनापति ही विरोधी विचारधारा से चुन लिया जाएगा तो विचारधारा को प्रदूषित एवं क्षरित होने से कौन बचा सकेगा ? आज उत्तर प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कवि – सम्मेलनों में यही हो रहा है | एक राष्ट्रवादी कवि एवं स्वयंसेवक होने के नाते इस विषय की जानकारी आप तक पहुँचाना मेरा कर्तव्य ही नहीं धर्म भी था | इस वैचारिक युद्ध में सेनापति का दायित्व साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसांगिक संगठन “ अखिल भारतीय साहित्य परिषद” या किसी राष्ट्रवादी कवि/ साहित्यकार को मिलना चाहिए न की विरोधी खेमे के किसी मसखरे बहुरूपिये को | श्रीमान जी से करवद्ध प्रार्थना है कि इस विषय पर संज्ञान लेते हुए संस्कृति मंत्रालय के कार्यक्रमों को विचारधारा से विमुख लोगों की चंगुल से बचाने की अविलम्ब कृपा करें | धन्यवाद भवदीय (जनार्दन पाण्डेय “प्रचंड” ) राष्ट्रवादी ओज कवि एवं स्वयंसेवक pjanardanp@gmail.com प्रतिलिपि : निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक संज्ञान हेतु प्रेषित १. डा. कृष्ण गोपाल जी, सह – सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ २. श्री अरुण कुमार जी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ३. श्री स्वांत रंजन जी , अखिल भारतीय वौद्धिक प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ४. श्री अनिल जी, क्षेत्र प्रचारक, पूर्वी क्षेत्र – उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ५. डा. अशोक दुबे जी, प्रान्त प्रचार प्रमुख, अवध प्रान्त, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ६. माननीय डा. नीलकंठ तिवारी जी, मंत्री संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ७. श्री उमेश शुक्ला जी– महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अवध प्रांत, लखनऊ Janardan Pandey Prachand ...


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