वाराणसी / उत्तरप्रदेश   116
- लॉक डाउन के बीच बीएचयू से यौन हिंसा की बड़ी खबर - कांग्रेस और वाम समर्थित ज्वाइंट एक्शन कमेटी की पूर्व सदस्य ने लगाए आरोप - सोशल मीडिया पर छात्रा का आरोप,संगठन यौन अपराधियों का गिरोह - आरोपियों को बचाने की हो रही कोशिश - सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान प्रियंका गांधी ने की थी इस संगठन के लोगों से मुलाकात - इंटरमीडिएट कॉलेज का एक अध्यापक है पूरे समूह का मास्टरमाइंड वाराणसी | कोरोना संकट के कारण किये गए लॉकडाउन के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय से यौन अत्याचार की एक खबर सामने आयी है | घटना को लेकर सोशल मीडिया पर खासा हंगामा मचा हुआ है | परिसर में काम करने वाले कांग्रेस और वाम समर्थित छात्र समूह, ज्वाइंट एक्शन कमेटी की पूर्व सदस्य ने समूह के तीन सदस्यों पर यौन अत्याचार एवं लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाया है | यही नहीं आरोप लगाने वाली सदस्य ने संगठन पर दोषियों को बचाने का भी आरोप लगाया है | साथ ही आरोपिता ने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्रों से इस समूह के बहिष्कार के साथ समूह में शामिल यौन भेड़ियों को बेनकाब करने का भी आह्वान किया है | क्या है घटना क्रम ज्वाइंट एक्शन कमेटी की एक पूर्व सदस्य शिवांगी चौबे ( यौन अपराध के मामलों में पीड़िता का नाम लिखना कानूनन अपराध है, लेकिन पीड़िता ने स्वयं अपना नाम उजागर इसलिए इस नियम का औचित्य ख़त्म हो जाता है ) ने 27 अप्रैल को अपने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा | जिसमें उक्त सदस्या ने 2017 और 2018 की सर्दियों में अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया | उसी पोस्ट में शिवानी ने लिखा कि जब देश में ''मी टू" कैम्पेन का दौर चल रहा था तो मैं लगभग दस महीने बाद अपने ऊपर हुए अत्याचार को कहने का साहस जुटा पायी | 28 अप्रैल को शिवांगी ने फिर एक लम्बा पोस्ट लिखा और विस्तार से बताया कि दिसंबर 2017 में कमेटी के सदस्य राज अभिषेक सिंह द्वारा दो बार और सितम्बर 2018 में शांतनु सिंह द्वारा एक बार मेरा प्रत्यक्ष यौन शोषण किया गया | जबकि दीपक राजगुरु ने मेरे चरित्र पर हमला करते हुए सार्वजनिक रूप कि मैं कितनी आसानी उपलब्ध हूँ | शिवांगी यहीं नहीं रुकती हैं | वो अपने पोस्ट में लिखती हैं कि मैं कोई अकेली लड़की नहीं हूँ जो इस समूह के पुरुषों का शिकार हुई हूँ | वो लिखती हैं कि मेरी जानकारी में ऐसी 7 महिलाएं हैं जो यौन हिंसा का शिकार हुई हैं | कुछ इसी राजनैतिक समूह की सदस्य हैं और कुछ बाहर की | जिन पुरुषों ने शोषण किया वे हैं राज अभिषेक, शांतनु सिंह, दीपक राजगुरु अनंत शुक्ला | वे यह भी कहती हैं कि यौन शोषण करने वाले समूह के ये वो पुरुष हैं जिनकी जानकारी है | शिवांगी का आरोप है कि मेरे द्वारा शिकायत के बाद कमेटी की केवल एक मीटिंग बुलाई गयी जिसमें राज अभिषेक ने मेरे साथ किये गए किसी भी यौन अत्याचार से इनकार कर दिया गया | अलबत्ता मेरे ऊपर ही कीचड़ उछाला गया कि मैंने जब घटना हुई तब क्यों नहीं शिकायत की | यह वाकया मेरे लिए दुःखद था | मैं इस समूह से पिछले दो वर्षों से जुड़ी थी | मुझे लगता था कि जैसा यहां कहा जाता है कि कमेटी महिलाओं के साथ समानता का व्यवहार करती है | लैंगिक न्याय की बात होती है तो मुझे भी न्याय मिलेगा | मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ | मै ही दोषी ठहराई गयी और मेरे साथ यौन हिंसा करने वाले पाक-साफ बने रहे और समूह में सक्रीय रहे जबकि मुझे समूह छोड़ना पड़ा | ये वो लोग हैं जो गांधी का नाम लेते हैं | सत्य-अहिंसा की बात करते हैं | ज्वाइंट एक्शन कमेटी की सफाई 28 अप्रैल के शिवांगी की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कमेटी की जमकर आलोचना हुई | उसे यौन अपराधियों का गिरोह तक कहा गया | सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं से घबराई ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने 29 अप्रैल की शाम अपने फेसबुक पेज पर एक लम्बा पोस्ट लिखा जिसमें यह बताने की कोशिश की गयी कि 1- कमेटी महिलाओं के साथ हिंसा के मामलों में संवेदनशील है | लैंगिक न्याय कमेटी के प्रमुख एजेंडों में एक है | 2- शिवांगी प्रकरण में मामला संज्ञान में आने के बाद एक मीटिंग बुलाकर विस्तृत चर्चा की गयी जिसमें शिवांगी ने खुद ही मामले में किसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही से इनकार कर दिया और राज अभिषेक को पूरे मामले से बरी करते हुए खुद को ज्वाइंट एक्शन कमेटी से अलग कर लिया | 3- इस प्रकरण के बाद यह आवश्यकता महसूस की गयी कि संगठन से जुड़ी या किसी भी महिला के साथ लैंगिक न्याय के लिए एक आतंरिक अनुशासन एवं शिकायत कमेटी का गठन किया गया | जिसकी सदस्य हैं-विजन संस्था की जागृति राही, क्लाइमेट एजेंडा की एकता शेखर और रिदम संस्था के अनूप श्रमिक | 4- ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने समूह में कार्य करने वाली महिला सदस्यों से किसी प्रकार की शिकायत के लिए 30 दिन का समय दिया और तब तक के लिए राज अभिषेक, शांतनु सिंह अनंत शुक्ला को समूह से निष्कासित कर दिया गया | अपने इस पोस्ट के तुरंत बाद ही ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने अपने समूह की महिला सदस्यों की तरफ से भी पूरे प्रकरण में एक पोस्ट लिख कर सफाई देने और महिलाओं से शिकायत की अपील की गयी | लेकिन उस पुरे पोस्ट में किसी महिला सदस्य का नाम नहीं था जिनकी तरफ से ये पोस्ट लिखी गयी थी | उसी रात कमेटी ने शाम को लिखे अपने सफाइनामे के बाद एक और स्पष्टीकरण जारी किया | शिवांगी का पलटवार ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सफाइनामे और उसके महिला सदस्यों की पोस्ट के बाद शिवांगी ने पुनः उसी रात एक बेहद कठोर पोस्ट लिखा | शिवांगी ने लिखा कि..."ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने आज झूठा स्टेटमेंट जारी कर के ये साबित कर दिया कि उस ग्रुप के कुछ लोग ही abusers नहीं है बल्कि उसका एक-एक सदस्य सेक्सुअल abuser के साथ खड़ा है | उन्होंने किसी भी abuser से बिना सवाल किए अपने स्टेटमेंट में हम पर निजी वार किया और लगभग हर बात झूठ ही लिखी। किसी और औरत की स्टोरी को तो संज्ञान में भी नहीं लिया गया। एक सीरियल abuser को महज़ 30 दिन के लिए ग्रुप से निकाला गया। वैसे भी लॉकडाउन है। ऐसे मर्द जिन्होंने न जाने कितनी औरतों के साथ यौन उत्पीड़न किया है, उन्हें जीवन भर का ट्रॉमा दिया है, उसकी कीमत 30 दिन लगाई गई है। बाज़ारीकरण ये लोग बहुत अच्छी कर लेते हैं। महिला सदस्यों का बयान जारी किया गया। वो महिला सदस्य जिन्होंने मीटिंग में मेरे चरित्र पर सवाल उठाए और जो सेक्सुअल abusers के साथ लगातार खड़ी रहीं। मेरी जानकारी में जिन महिला सदस्यों ने ये बयान लिखा है, उसमें से एक महिला के यौन उत्पीड़न की बात हमने ही सबके सामने रखी थी और उनकी पहचान छुपाई। वो भी इस बयान में शामिल है। अपने ऊपर थोड़ी हँसी आ रही है। राज, अनंत, दीपक किसी की तरफ़ से न कोई सफ़ाई आयी, न माफ़ी और ना ही इनसे सवाल किया गया। ख़ुद ही उत्पीड़ित कर के ख़ुद को बरी कर देना सिर्फ़ इस देश के सुप्रीम कोर्ट की फ़ितरत ही नहीं है। ये काफ़ी शर्मनाक है कि जिन लोगों के मुँह से औरत की आज़ादी की बात सुनी थी, वो लोग यौन हिंसा करने वालों को बचा रहे हैं और यौन उत्पीड़न को एक मज़ाक बना कर उसकी 30 दिन की कीमत लगा रहे हैं। ऐसे लोग जो M J अकबर पर सवाल करते नहीं थकते, S K चौबे पर सवाल करते नहीं थकते, आज अपने ऊपर लगे इल्ज़ामों से भाग रहे हैं और उसको जस्टिफाई कर रहे हैं।शर्म की बात है कि हम इस ग्रुप का कभी हिस्सा थे। हम एक बार फिर उनके स्टेटमेंट के सच होने से इनकार करते हैं। और अभी भी अपनी बात पर खड़े हैं कि कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन मर्दों को पोस्टर बॉय बनाया गया, औरतों के मुद्दों पर इन्हें माइक थमाया गया, और इनको इनकी राजनीति चमकाने का पूरा मौका दिया गया। पर अब वक़्त आ गया है कि ऐसे लोगों को पहचाना जाए और इनसे बचा जाए। हमने इसलिए ये बात शुरू ही नहीं की ताकि JAC हमको न्याय दे सके, उसकी हमको उम्मीद होती तो हमने उसी मीटिंग में ये ग्रुप न छोड़ा होता। हमने ये बात शुरू की क्योंकि हैं देख रहे थे कि बहुत सी नई औरतें इनसे जुड़ रही थीं और वो इनके इरादों से बिल्कुल बेख़बर थीं।....ये लड़ाई ख़तम नहीं हुई है, शुरू हुई है। ऐसे लोग जो safe space claim करते हैं, इनसे बचें और इनके झाँसे में न आयें।जॉइंट एक्शन कमिटी यौन उत्पीड़न करने वालों को पनाह देती है, और इसका पूरी तरह बहिष्कार होना चाहिए।" इस गंभीर और संवेदनशील प्रकरण के अनेक दुःखद पहलू हैं जो ज्वाइंट एक्शन कमेटी को संदिग्ध बनाते हैं | इसे समझने की जरूरत है - 1- ज्वाइंट एक्शन कमेटी के किसी भी बयान में किसी सदस्य का कोई जिक्र नहीं है | न ही इस बात का कहीं कोई जिक्र है कि प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद कमेटी ने कोई मीटिंग की जिसमें उक्त बयान जारी करने का निर्णय किया गया | उस मीटिंग में कौन-कौन लोग उपस्थित थे इसका भी जिक्र नहीं है क्योंकि मीटिंग का ही कोई जिक्र नहीं है | इससे पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत होता है और बयान किसी एक सदस्य द्वारा लिखा गया जान पड़ता है | 2- प्रकरण के सन्दर्भ में समूह की महिला सदस्यों की तरफ से जारी बयां में भी किसी महिला सदस्य का न तो उल्लेख है और न ही बयान पर हस्ताक्षर | कमेटी का आचरण इससे भी संदिग्ध दिखाई देता है | 3- कमेटी ने ऐसे प्रकरणों के लिए जो आतंरिक शिकायत कमेटी का गठन किया है उसके सदस्य पूर्व से ही समूह की गतिविधियों से जुड़ी या जुड़े रहे हैं | इसलिए उनसे इस या ऐसे किसी प्रकरण में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के हितों के विरुद्ध जाकर कार्यवाही की कोई उम्मीद करना बेमानी ही होगा | अच्छा तो ये होता कि वास्तव में कमेटी अगर न्याय की पक्षधर थी या है तो उसे पीड़िता के द्वारा नामित व्यक्तियों को सदस्य बनाया जाना चाहिए था ताकि इस या किसी भी पीड़िता को न्याय की उम्मीद रहे | यह तो वैसी ही बात लगती है कि हम ही चोर-हम ही कोतवाल | 4- इस पुरे प्रकरण का सबसे शर्मनाक और असंवैधानिक पहलू ये है कि पूरे प्रकरण में कमेटी ने खुद को ही न्यायाधीश घोषित कर लिया है | शिवांगी जिस बात का प्रतिकार कर रही हैं कि जो लोग बीएचयू के प्रो. एस.के. चौबे या एमजे अकबर के प्रकरण में एक प्रकार की कार्यवाही की बात करते हैं उसके लिए आंदोलन करते हैं वही लोग अपने समूह की महिला सदस्य के साथ समूह के ही एक पुरुष सदस्य द्वारा किये गए यौन उत्पीड़न के मामले में दूसरा रुख अख्तियार करते हैं जो इनका दोहरा चरित्र है | 5- कमेटी अपने स्पष्टीकरण में बार-बार इस बात का तो हवाला देती है कि पीड़ित सदस्य के लिए न्यायालय का दरवाजा खुला है लेकिन कमेटी स्वयं उस सदस्या को न्याय दिलाने के लिए किसी सक्षम संवैधानिक पीठ के सम्मुख बात रखने या यौन उत्पीड़कों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश नहीं करती | जिससे ज्वाइंट एक्शन कमेटी की लैंगिक समानता और सामाजिक निष्ठा जैसी बातें केवल कहानी ही लगती हैं | बहरहाल शिवांगी चौबे का ज्वाइंट एक्शन कमेटी के ऊपर लगाए गए आरोपों से एक बात तो साफ है कि बीएचयू परिसर में काम कर रहे स्वघोषित छात्र समूहों के अंदरखाने व्यापक भ्रष्टाचार पल रहा है जिसकी खबर न तो बीएचयू प्रशासन को है और न ही जिला प्रशासन को | क्या है ज्वाइंट एक्शन कमेटी ज्वाइंट एक्शन कमेटी पहली बार तब चर्चा में आयी थी जब पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी के कार्यकाल में छात्राओं ने आंदोलन किया था | तब, यह माना जा रहा था कि आंदोलन के पीछे आईआईटी बीएचयू से निष्कासित मार्क्सवादी विचारधारा के कार्यकर्ता मैग्सेसे विजेता संदीप पांडेय का हाथ है | जिन्होंने विश्वविद्यालय में काम करने वाले विभिन्न छात्र समूहों को मिलाकर ज्वाइंट एक्शन कमेटी बनायी है | परिसर के बाहर इस समूह को पांडेय के पूर्व संगठन आशा ट्रस्ट से भी मदद मिलते रहने की चर्चा है | कमेटी को रहा है कांग्रेस का समर्थन कमेटी का संचालन करने वाला धन्नजय त्रिपाठी उर्फ़ धन्नजय शुग्गु कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से जुड़ा हुआ है| पिछले दिनों सीएए विरोधी आंदोलन में गिरफ्तार इस समूह से जुड़े लोगों से मुलाकात करने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी विशेषरूप से बनारस आयी थीं | प्रियंका को बनारस लाने की पहल पूर्व विधायक अजय राय ने की थी | एनएसयूआई से जुड़े तमाम छात्र इस समूह में सक्रिय हैं | वामपंथी संगठनों,एनजीओ और ईसाई मिशनरियों का भी कमेटी को है समर्थन बीएचयू को केंद्र बनाकर काम करने वाले इस समूह को परिसर के बाहर उन तमाम संगठनों का भी समर्थन प्राप्त होता रहा है जिनका रुख सरकार विरोधी है | इन सहयोगियों में ईसाई मिशनरी से लेकर देश में प्रतिबंधित ग्रीन पीस संस्था से जुड़े रहे वर्तमान में पर्यावरण का एजेंडा चलने वाले विदेशी फंडेड क्लाइमेट एजेंडा, विजन,रिदम जैसे कांग्रेस समर्थित एनजीओ, आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता योगेंद्र यादव के स्वराज इंडिया और जिले में ऐसे तमाम समूहों को जोड़ने वाले साझा संस्कृति मंच शामिल है जिनका कमेटी को समर्थन हासिल रहा है | इंटरमीडिएट कॉलेज का एक अध्यापक है पूरे समूह का मास्टरमाइंड यूं तो ज्वाइंट एक्शन कमेटी अनेक समूहों का एक ज्वाइंट संगठन है लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार इसका संचालन इंटरमीडिएट कॉलेज में अध्यापन करने वाला एक अध्यापक है | पूर्व में यह मुजफ्फरनगर में पोस्टेड रहा है और पिछले वर्ष ट्रांसफर करा कर बनारस आया है | माना जा रहा है कि प्रकरण के सन्दर्भ में की समस्त लिखा-पढ़ी उसी अध्यापक की कारस्तानी है | संदीप पाण्डेय के साथ और उनसे जुड़े आशा ट्रस्ट से उसके गहरे ताल्लुकात बताये जाते हैं | ...


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