पश्चिम बंगाल / कोलकाता   7375
तपन दा नहीं रहे पिछले कई बरस हिन्दू समाहिती की वेबसाइट द्वारा संकलित हिन्दू उत्पीड़न की खबरे पढ़ते हुए गुजरे, बंगाल में हिन्दू समाहिती, बंग्लादेश पर हिन्दू ह्यूमन राइट्स और केरल की हैण्डव: केरलम कुछ अच्छी वेबसाइट्स है जो ह्यूमन राइट समेत अन्य विषयों पर मुखर हैं। पिछले एक दो बरस से यह पढ़ने का सिलसिला छूट गया था। तपन दा हिन्दू समाहिती में भी नही रहे, शायद यही कारण हैं कि रात के इस प्रहर और उनकी मृत्यु के करीब चार दिन बीत जाने पर स्वप्न दासगुप्ता के ट्वीट से उनके निधन के पता चला। उनकी मृत्यु 12 जुलाई को ही कोलकता में कोविड कोरोना की वजह से हो गयी। तीस साल का उनका कम्युनिस्टों संग संघर्ष अंततः कम्युनिस्टों के ही वायरस ने खत्म कर दिया। कभी संघ प्रचारक रहे तपन दा ने संघ से इतर कुछ नया करने की ठान 2008 में हिन्दू समाहिती बनाई। वह दौर बंगलादेश में सेक्युलर विचारकों के विरोध एवं सोसियल मीडिया एक्टिविस्टों के नाम पर हिन्दू दमन का और बंगाल में ममता के अति सेक्युलरवाद के समर्थन का था। हिन्दू समाहिती इन सब को कवर करती, जब ममता ने मुहर्रम के चलते जब दुर्गा पूजा पर रोक लगाई तब वे अकेले ही बंगाल सरकार से भिड़ गए, रामनवमी के जुलूस को लेकर उनपर हमला भी हुआ जिसमें उन्हें चोटें भी आई , रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के खिलाफ जब वे मुखर हुए तब उन्हें जेल में डाल दिया गया। अभी हाल फिलहाल में मुर्शिदाबाद में बंधु पाल की हत्या पर उन्होंने अकेले ही बंगाल में महाबंद करवा दिया था। 1975 में प्रचारक के बाद से आज 2020 तक उनकी 45 साल की यह यात्रा हिन्दू एकता व सांगठनिकता के लिए ही समर्पित रही। बंगाल में हिन्दू समाहति व तमिल नाडु में हिन्दू मुन्नानी दो संघ के इतर काम करने वाली हिंदुनिष्ठ संस्थाए हैं ,यूँ तो पूर्वांचल में योगी बाबा की हिन्दू युवा वाहिनी और कर्नाटक में राम सेने भी हैं पर इन जगहों में संघ की सांगठनिक क्षमता अधिक होने की वजह से यह दोनों वो प्रमुखता नही पा सकी जो हिन्दू समाहति व हिन्दू मुन्नानी ने बनाई हैं। छोटी छोटी कुर्सियों पर उनकी तस्वीर लगा बंगाल आसाम भर में कुल 200 से 300 जगह उनको लोगों ने श्रधांजलि दी, यह विदाई बड़े बड़े नेताओं को भी हासिल नही, कुछ बात उनको सदा अन्यों से जुदा करती रही। विपरीत परिस्थितियों में रहकर भी विचारधारा के लिए, समाज के लिए, समर्पित भाव से काम करने वाले तपन दा के प्रेरणादायी जीवन का अंत पीड़ादायक हैं। उन्हें शत शत प्रणाम ...


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