सिंगापुर/नई दिल्ली/आजमगढ़   7379
राष्ट्रीय राजनीति में समाजवाद को बॉलीवुड और कॉरपोरेट से जोड़ने वाले सांसद अमर सिंह ने कुछ देर पहले सिंगापुर में अंतिम सांस ली। मुलायम सिंह यादव को सुब्रत राय सहारा , अमिताभ बच्चन और अनिल अंबानी से जोड़ने वाले अमर सिंह ही थे। कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति शुरू करने के बाद वे समाजवादी पार्टी से जुड़े और उसको पूंजीवादी बना दिया। दोस्ती और दुश्मनी दोनों जमकर निभाने के लिए प्रसिद्ध अमरसिंह जोड़तोड़ और असम्भव लगने वाले समीकरण बिठाने में माहिर थे। लेकिन अखिलेश यादव के ताकतवर होते ही वे सपा में अवांछित हो गए और अंततः उन नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक बन गए जिन्हें वे जमकर कोसते थे। उप्र के ठाकुरों को पहले मुलायम सिंह और फिर भाजपा से जोड़ने में उनकी बड़ी भूमिका रही। अमर सिंह मूलतः सम्पर्कों की राजनीति करते थे। उद्योग, फ़िल्म और माफिया तीनों से उनके सम्बंध चर्चित रहे। देश की हाई प्रोफाइल पार्टियों में अमर सिंह एक स्थायी मेहमान होते थे। फिल्मी आयोजनों में अगली पंक्ति में नजर आने वाले अमर सिंह ने मुलायम सिंह के गांव सैफई में दिग्गज फिल्मी कलाकारों को लाने का सिलसिला शुरू किया। विवादों से घिरे रहना उनका शौक था। अच्छा रहन - सहन और रईसी उनकी पहिचान थी। बातचीत में अत्यंत निपुण अमर सिंह शेरो शायरी में हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। आंध्र की जयाप्रदा को उप्र की मुस्लिम बहुल रामपुर सीट से लोकसभा चुनाव जितवाना उन्हीं का खेल था । किडनी की बीमारी ने उन्हें बहुत सताया लेकिन उनकी जीवटता बनी रही। जीवन के उत्तरार्ध में जयाप्रदा उनकी हमसाया बनी रहीं। अंत में अमर सिंह अपने नाम के विरुद्ध मृत्यु के गाल में समा गए । बीते छह माह से वे सिंगापुर में इलाज करवा रहे थे। जीवन भर राजनीति को उंगलियों पर नचाते रहे अमरसिंह के अंतिम कुछ वर्ष राजनीतिक विस्थापित जैसे बीते। लेकिन उन्होंने एक लंबे दौर को अपनी उपस्थिति और दांव पेंच से प्रभावित किया। कोई उन्हें पसंद करे या नापसंद किन्तु उपेक्षित नहीं कर सकता था। राजनीति को एक नई शैली से परिचित करवाने के लिए वे याद किये जाएंगे। श्रद्धांजलि। (साभार :वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र बाजपेयी की फेसबुक पोस्ट ) ...


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