उत्तर प्रदेश /लखनऊ ।
विभागीय ज्ञान..... *राजस्व विभाग में प्रचलित प्रमुख शब्द और उनके अर्थ* रकबा- क्षेत्रफल, खसरा- भूमि क्रमांक, पांचसाला- पिछले पांच' साल का खसरा चांदा- सीमा चिन्ह, मुनारा- सर्वेक्षण चिन्ह, उपकर - अबवाब (मुख्य कर का उपकर) मौसूली- वसूली प्राप्त करना, नस्ती- खात्मा, अलामत- छोटे-छोटे चिन्ह, मसाहती ग्राम- जिसकी सीमा न हो मीजान- कुल, सकूनत- निवास वाजिब-उल-अर्ज- निजी जमीन में सार्वजनिक उपयोग दर्शाने वाला रिकार्ड गिरदावरी- खेतों व फसलों का निरीक्षण कर रिकार्ड करना, तितम्मा मिलान- हल, बैल, कृषि यंत्र की गणना, गोशवारा- महायोग, रूढ़ अलामात- परंपरागत सीमा, हलफनामा- शपथ पत्र, बैनामा- विक्रय पत्र, बयशुदा- खरीदी, काबिज- कब्जा है, दीगर- अन्य, वारिसान- उत्तराधिकारी, बख्शीश- उपहार या दान, फौत - मौत, रहन- गिरवी, कैफियत- स्पष्टीकरण/विवरण साकिन- निवासी मौजा बेचिराग - बिना आबादी का गांव फकुल रहन - गिरवी रखी भूमि को छुड़ा लेना तबादला - भूमि के बदले भूमि लेना बैय - जमीन बेच देना मुसन्ना - असल रिकॉर्ड के स्थान पर बनाया जाने वाला रिकॉर्ड फर्द - नक़ल फर्द बदर - राजस्व रिकॉर्ड में होने वाली गलती को ठीक करना मिन - भाग साम्बिक - भूतपूर्व पुख्ता औसत झाड़ - पैदावार के अनुसार पक्की फसल फसल रबी - आसाढ़ की फसल फसल खरीफ - सावनी की फसल जिंसवार- फसलवार जिंस का जोड़ जलसाआम - जनसभा बशनाखत - की पहचान पर वल्दियत - पिता का नाम बतलाना हमशीरा - बहन हद - सीमा हदूद - सीमाएं सिहद्दा - तीन गांवों को एक स्थान पर मिलाने वाला सीमा पत्थर बनाम - के नाम मिन जानिब - की ओर से बिला हिस्सा - जिसमें भाग न हो नीलाम - खुली बोली द्वारा बेचना दस्तक - मांग का अधिकार तकाबी - फसल ऋण कुर्की - किसी वस्तु को सरकारी अधिकार में लेना बदस्तूर - हमेशा की तरह या पूर्ववत हाल - वर्तमान खाका - प्रारूप कारगुजारी - प्रगति रिपोर्ट झलार - नदी नाले से पानी देने का साधन जमा - भूमिकर तरमीम - बदल देना या सुधार देना मालगुजारी - भूमिकर जदीद - नया खुर्द - छोटा कलां - बड़ा खुश हैसियत - अच्छी हालत इकरारनामा - आपसी फैसला गोरा देह भूमि – गांव के साथ लगी भूमि दो फसली - वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि सकूनत - निवास स्थान शजरा परचा - कपड़े पर बना खेतों का नक्शा शजरा किस्तवार - ट्रेसिंग पेपर पर बना हुआ खेतों का नक्शा मुसावी - मोटे कागज पर खेतों की सीमाएं दर्शाने वाला नक्शा पैमाना पीतल - मसावी बनाने के पीतल का बना हुआ इंच फरेरा - दूर झंडी देखने के लिए बांस पर बंधा तिकोना रंग-बिरंगा कपड़ा झंडी - लाइन को सीधा रखने के लिए 12 फीट का बांस क्रम - 66 इंच लम्बा जरीब का दसवां भाग गट्ठा - 57.157 इंच, जरीब का दसवां भाग अड्डा - जरीब की पड़ताल करने के लिए भूमि पर बनाया गया माप गज - भूमि नापने का पैमाना पैमाइश - भूमि का नापना शजरा नसब - भूमिदारों की वंशावली लाल किताब - गांव की भूमि से सम्बंधित पूर्ण जानकारी देने वाली पुस्तक मिसल हकूकियत - बंदोबस्त के समय विस्तार साथ तैयार की गई जमाबंदी जमाबंदी - भूमि की मिल्कियत और अधिकारों की पुस्तक खसरा गिरदावरी - हदबस्त - तहसीलवार गावों के नम्बर मिनजुमला – मिला-जुला भाग नवैयत या नौइयत- भू उपयोग पिसर मुतबन्ना - दत्तक पुत्र जोजे- पत्नी बेवा - विधवा वल्द - पिता कौमियत - जाति चाह आबनोशी- आबादी में पीने के उपयोग का कुआँ चाह आब पाशी- सिंचाई के लिए कुआँ साकिन -निवासी साकिन देह - भू अभिलेख से संबंधित उसी गांव का निवासी साकिन पाही - अन्य गांव का निवासी मुतवल्ली - मुस्लिम धार्मिक संपत्ति का कर्ता लगान - भूमिकर हदबंदी - सीमांकन बिलमुक्ता - इस खसरा नंबर के भूराजस्व मे अन्य नंबर का भूराजस्व जुड़ा हुआ है बकसरत दरखतान- अनगिनत वृक्ष मिन्हा - मिलाना इन्तकाल →मलकियत की तबदीली का आदेश । जरीब →भूमि नापने की लम्बी लोहे की जंजीर । रकबा बरारी →नम्बर की चारों भुजाओं की लम्बाई व चौडाई क्षेत्रफल निकालना रकबा→ खेत का क्षेत्रफल गोशा →खेत का हिस्सा बिसवा→ 20 बिसवांसी बिघा →20 बिसवा शर्क →पूर्व गर्व→ पश्चिम जनूब→ दक्षिण शुमाल→ उत्तर खेवट→ मलकियत का विवरण खतौनी→ कशतकार का विवरण पत्ती तरफ ठोला→ गॉंव में मालकों का समूह गिरदावर→ पटवारी के कार्य का निरीक्षण करने वाला RI दफ्तर कानूनगो →तहसील कार्यालय का कानूनगो नायब दफतर कानूनगो→ सहायक दफतर कानूनगो सदर कानूनगो→ जिला कार्यालय का कानूनगो । वासिल वाकी नवीस→ राजस्व विभाग की वसूली का लेखा रखने वाला कर्मचारी मालिक→ भूमि का भू-स्वामी कास्तकार→ भूमि को जोतने वाला एवं कास्त करने वाला । शामलात →सांझाी भूमि शामलात देह→ गॉंव की शामलात भूमि शामलात पाना →पाने की शामलात भूमि शामलात पत्ती →पत्ती की शामलात भूमि मुजारा→ भूमि को जोतने वाला जो मालिक को लगान देता हो । मौरूसी →बेदखल न होने वाला व लगान देने वाला मुजारा गैर मौरूसी →बेदखल होने योग्य कास्तकार नहरी →नहर के पानी से सिंचित भूमि । चाही नहरी→ नहर व कुएं द्वारा सिंचित भूमि चाही →क्एं द्वारा सिंचित भूमि चाही मुस्तार →खरीदे हुए पानी द्वारा सिंचित भूमि । बरानी→ वर्षा पर निर्भर भूमि । आबी →नहर व कुएं के अलावा अन्य साधनों से सिंचित भूमि । बंजर जदीद→ चार फसलों तक खाली भूमि । बंजर कदीम →आठ फसलों तक खाली पडी भूमि । गैर मुमकिन →कास्त के अयोग्य भूमि । नौतौड→ कास्त अयोग्य भूमि को कास्त योग्य बनाना । क्लर →शोरा या खार युक्त भूमि । चकौता →नकद लगान । सालाना →वार्षिक बटाई →पैदावार का भाग । तिहाई →पैदावार का 1/3 भाग । निसफी→ पैदावार का 1/2 भाग । पंज दुवंजी→ पैदावार का 2/5 भाग । चहाराम →पैदावार का 1/4 भाग । तीन चहाराम→ पैदावार का 3/4 भाग । मुन्द्रजा→ पूर्वलिखित (उपरोक्त) मजकूर→ चालू राहिन →गिरवी देने वाला । मुर्तहिन →गिरवी लेने वाला । बाया →भूमि बेचने वाला । मुस्तरी →भूमि खरीदने वाला । वाहिब →उपहार देने वाला । मौहबईला →उपहार लेने वाला । देहिन्दा→ देने वाला । गेरिन्दा →लेने वाला । लगान→ मुजारे से मालिक को मिलने वाली राशी या जिंस पैमाना हकीयत →शामलात भूमि में मालिक का अधिकारी । सरवर्क →आरम्भिक पृष्ठ । नक्शा कमीबेशी →पिछली जमाबन्दी के मुकाबले में क्षेत्रफल की कमी या वृद्वि हिब्बा →उपहार । बैयहकशुफा →भूमि खरीदने का न्यायालय द्वारा अधिकार । रहन बाकब्जा →कब्जे सहित गिरवी । आड रहन →बिला कब्जा गिरवी । रहन दर रहन →मुर्तहिन द्वारा कम राशि में गिरवी रखना । तबादला →भूमि के बदले भूमि लेना । पडत सरकार →राजस्व रिकार्ड रूम में रखी जाने वाली प्रति । पडत पटवार→ रिकार्ड की पटवारी के पास रखी जाने वाली प्रति फर्द बदर →राजस्व रिकार्ड में हुई गलती को ठीक करना । पुख्ता औसत झाड→ पैदावार के अनुसार पक्की फसल साबिक→ पूर्व का या पुराना या पहले का हाल →वर्तमान, मौजूदा । बिला हिस्सा →जिसमें भाग न हो । मिन जानिब →की ओर से । बशिनाखत →की पहचान पर । पिसर या वल्द →पुत्र दुखतर→ सुपुत्री वालिद→ पिता वालदा →माता महकूकी →काटकर दोबारा लिखना मसकूकी →बिना काटे पहले लेख पर दोबारा लिखना बुरजी→ सरवेरी सर्वेक्षण का पत्थर चक तशखीश →बन्दोबस्त के दौरान भूमि की पैदावार के अनुसार तहसील की भूमि का निरधारण दुफसली →वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि मेड़ →खेत की सीमा गोरा देह भूमि →गॉंव के साथ लगती भूमि हकदार→ मालिक भूमि महाल →ग्राम जदीद →नया इन्तकाल →मलकियत की तबदीली का आदेश । जरीब →भूमि नापने की लम्बी लोहे की जंजीर । रकबा बरारी →नम्बर की चारों भुजाओं की लम्बाई व चौडाई क्षेत्रफल निकालना रकबा→ खेत का क्षेत्रफल गोशा →खेत का हिस्सा बिसवा→ 20 बिसवांसी बिघा →20 बिसवा शर्क →पूर्व गर्व→ पश्चिम जनूब→ दक्षिण शुमाल→ उत्तर खेवट→ मलकियत का विवरण खतौनी→ कशतकार का विवरण पत्ती तरफ ठोला→ गॉंव में मालकों का समूह गिरदावर→ पटवारी के कार्य का निरीक्षण करने वाला RI दफ्तर कानूनगो →तहसील कार्यालय का कानूनगो नायब दफतर कानूनगो→ सहायक दफतर कानूनगो सदर कानूनगो→ जिला कार्यालय का कानूनगो । वासिल वाकी नवीस→ राजस्व विभाग की वसूली का लेखा रखने वाला कर्मचारी मालिक→ भूमि का भू-स्वामी कास्तकार→ भूमि को जोतने वाला एवं कास्त करने वाला । शामलात →सांझाी भूमि शामलात देह→ गॉंव की शामलात भूमि शामलात पाना →पाने की शामलात भूमि शामलात पत्ती →पत्ती की शामलात भूमि मुजारा→ भूमि को जोतने वाला जो मालिक को लगान देता हो । मौरूसी →बेदखल न होने वाला व लगान देने वाला मुजारा गैर मौरूसी →बेदखल होने योग्य कास्तकार नहरी →नहर के पानी से सिंचित भूमि । चाही नहरी→ नहर व कुएं द्वारा सिंचित भूमि चाही →क्एं द्वारा सिंचित भूमि चाही मुस्तार →खरीदे हुए पानी द्वारा सिंचित भूमि । बरानी→ वर्षा पर निर्भर भूमि । आबी →नहर व कुएं के अलावा अन्य साधनों से सिंचित भूमि । बंजर जदीद→ चार फसलों तक खाली भूमि । बंजर कदीम →आठ फसलों तक खाली पडी भूमि । गैर मुमकिन →कास्त के अयोग्य भूमि । नौतौड→ कास्त अयोग्य भूमि को कास्त योग्य बनाना । क्लर →शोरा या खार युक्त भूमि । चकौता →नकद लगान । सालाना →वार्षिक बटाई →पैदावार का भाग । तिहाई →पैदावार का 1/3 भाग । निसफी→ पैदावार का 1/2 भाग । पंज दुवंजी→ पैदावार का 2/5 भाग । चहाराम →पैदावार का 1/4 भाग । तीन चहाराम→ पैदावार का 3/4 भाग । मुन्द्रजा→ पूर्वलिखित (उपरोक्त) मजकूर→ चालू राहिन →गिरवी देने वाला । मुर्तहिन →गिरवी लेने वाला । बाया →भूमि बेचने वाला । मुस्तरी →भूमि खरीदने वाला । वाहिब →उपहार देने वाला । मौहबईला →उपहार लेने वाला । देहिन्दा→ देने वाला । गेरिन्दा →लेने वाला । लगान→ मुजारे से मालिक को मिलने वाली राशी या जिंस पैमाना हकीयत →शामलात भूमि में मालिक का अधिकारी । सरवर्क →आरम्भिक पृष्ठ । नक्शा कमीबेशी →पिछली जमाबन्दी के मुकाबले में क्षेत्रफल की कमी या वृद्वि हिब्बा →उपहार । बैयहकशुफा →भूमि खरीदने का न्यायालय द्वारा अधिकार । रहन बाकब्जा →कब्जे सहित गिरवी । आड रहन →बिला कब्जा गिरवी । रहन दर रहन →मुर्तहिन द्वारा कम राशि में गिरवी रखना । तबादला →भूमि के बदले भूमि लेना । पडत सरकार →राजस्व रिकार्ड रूम में रखी जाने वाली प्रति । पडत पटवार→ रिकार्ड की पटवारी के पास रखी जाने वाली प्रति फर्द बदर →राजस्व रिकार्ड में हुई गलती को ठीक करना । पुख्ता औसत झाड→ पैदावार के अनुसार पक्की फसल साबिक→ पूर्व का या पुराना या पहले का हाल →वर्तमान, मौजूदा । बिला हिस्सा →जिसमें भाग न हो । मिन जानिब →की ओर से । बशिनाखत →की पहचान पर । पिसर या वल्द →पुत्र दुखतर→ सुपुत्री वालिद→ पिता वालदा →माता महकूकी →काटकर दोबारा लिखना मसकूकी →बिना काटे पहले लेख पर दोबारा लिखना बुरजी→ सरवेरी सर्वेक्षण का पत्थर चक तशखीश →बन्दोबस्त के दौरान भूमि की पैदावार के अनुसार तहसील की भूमि का निरधारण दुफसली →वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि मेड़ →खेत की सीमा गोरा देह भूमि →गॉंव के साथ लगती भूमि हकदार→ मालिक भूमि महाल →ग्राम जदीद →नया साभार:- फेसबुक ...


नयी दिल्ली / महाराष्ट्र।
साभार अविनाश त्रिपाठी जी दो दिन पहले मैंने जीवन में पहली बार समुद्र देखा। किनारे से खड़े होकर देखने में समुद्र जितना खूबसूरत लगता है अंदर से उतना ही भयानक, तब आपका जहाज ही आपकी जमीन है और एक बार वो छूट गया तो पूरा समुद्र ही आपका कब्रिस्तान फिर भी एक आदमी है जिसने जानते बूझते बीच समुद्र में अपने जहाज से छलांग लगा दी, बिना किनारे तक पहुंचने की परवाह किए। ये 8 जुलाई 1910 था जब ब्रिटिश जहाज मोरिया फ्रांस के मार्सेल बंदरगाह पहुंचने वाला था। तब सख्त निगरानी में भारत ले जाए जा रहे 27 साल के सावरकर ने जहाज से छलांग लगा दी। लिखने वालों ने इसकी तुलना छत्रपति शिवाजी के औरंगजेब के कैद से निकल कर भागने से की। शौच के बहाने अंग्रेज पुलिस को चकमा देकर सावरकर बीच समुद्र में कूद गए। अंग्रेज पुलिस ने जहाज से उनपर गोलियां चलानी शुरू कर दी। बाद में नाव से उनका पीछा किया गया। कुछ घंटे तैरकर आखिरकार सावरकर को फ्रांस का किनारा मिल गया। कई असफल प्रयास करने के बाद 9 फीट ऊंची चट्टान चढ़कर सावरकर फ्रांस की जमीन पर थे। उन्होंने मौका पाते ही खुद को फ्रंच पुलिस के जवान को सौंप दिया लेकिन उनके पीछा करते हुए पहुंची ब्रिटिश पुलिस के दबाव में आकर फ्रंच सिपाही ने उन्हें वापस अंग्रेज पुलिस के हवाले कर दिया। इधर सावरकर भारत पहुंचे उधर उनकी गिरफ्तारी को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस की सरकार हेग के इंटरनेशनल कोर्ट पहुंच गई। फ्रांस को इस केस में हार का मुंह देखना पड़ा। फ्रंच प्रधानमंत्री की विपक्ष ने जमकर लानत-मलातन की लेकिन किसी गुलाम भारतीय के लिए फ्रंच सरकार ज्यादा दर्द लेती भी क्यों। जिस कोर्ट में सावरकर को 50 साल काला पानी की सजा हुई उस कोर्ट में सावरकर को अपने पक्ष में बोलने तक का अधिकार नहीं था। बिना आरोपी का पक्ष जाने ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 50 साल के लिए कालापानी भेज दिया। यूरोप के बर्फीले पानी में अपने जहाज से कूदने वाले सावरकर को वीर लिखने पर आज मजाक बनाया जाता है अंग्रेजों की गोलियां से बचते हुए सागर पार करने वाले सावरकर की दया याचिकाओं पर सवाल किया जाता है। अपनी वर्दी पर D (dangerous)का बिल्ला टांगे काला पानी के अंदर 6-6 महीनों के लिए Solitary confinement (जेल के अंदर जेल) पाने वाले सावरकर को अंग्रेजों का दलाल कहा जाता है और ये उस देश की कहानी है जिसके राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को Boer War में अंग्रेज सरकार की वफादारी के लिए gold medal for loyalty और केसरी हिन्द की उपाधी दी गई और दो दिन पहले राहुल गांधी ने दिल्ली में अपना धरना इसलिए दो घंटे पहले समाप्त कर दिया क्योंकि ठंड बहुत थी या फेनमिषें हससि निर्दया कैसा का वचन भंगिसी ऐसा त्वत्स्वामित्वा सांप्रत जी मिरवीते भिनि का आंग्लभूमीते मन्मातेला अबला म्हणुनि फसवीसी मज विवासनाते देशी तरि आंग्लभूमी भयभीता रे अबला न माझि ही माता रे कथिल हे अगस्तिस आता रे जो आचमनी एक क्षणी तुज प्याला ॥ सागरा प्राण तळमळला You are laughing at me (in the form of the foam in your waves), but why did you break your promise of taking me back to my mother ? You have always claimed to be strong, but you are in fact afraid of the British rule. You try to call my mother weak and coward, but it applies to you. My mother is not weak, Agasthi, one of her sons had swallowed you in an instant (from the story of Agasthi Rishi) Take an oath that even if I get the throne of ‘Deity Indra’, I will decline the same and die as the last Hindu !’ Vinayak Damodar Savarkar...


नयी दिल्ली/खनऊ।
न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भातृभाज्यं न च भारकारी । व्ययेकृते वर्द्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्व धनप्रधानम् । बचपन से यह श्लोक विद्यालय की दीवाल पर लिखा हुआ पढ़ता आया हूँ । चुनाव ड्यूटी में भी प्राथमिक शालाओं में जाना हुआ है तो विद्यारूपी धन की शाश्वत अनश्वरता दर्शाता यह श्लोक अब भी दीवारों की शोभा बढ़ाता दिखाई देता है। चाणक्य का कहना था कि धन की रक्षा चोरों और राजपुरुषों से करनी चाहिये । आपके पास धन है इसका पता लगते ही चोर और राजा दोनों ही सक्रिय हो जाते हैं और येन केन प्रकारेण सेंध लगा कर या शुल्क लगा कर धन छीनने का पूरा प्रयास करते हैं । लेकिन इस श्लोक में चोर और राजपुरुष के समकक्ष भाई को भी खड़ा कर दिया गया है । यानी विद्या ऐसा घन है जिसे न चोर चुरा सकता है न राजा अपहरण कर सकता है और न भाई बाँट सकता है । न ही इस धन में इतना भार होता है कि थक कर कहीं रख दें । सबसे बड़ी बात कि खर्च करने पर यह धन नष्ट होने की बजाय बढ़ता ही है । बहुत से मित्रों के पास कतिपय विषयों पर बहुत गहन अध्ययन है मगर पूछने पर भी नहीं बताते । मुझे लगता है कि विद्या का निरंतर उपयोग न करने से वह नष्ट हो जाती है । यज्ञोपवीत के सूत्र तीन ऋणों के द्योतक हैं जो आदमी पर जीवन भर सवार रहते हैं । मातृ ऋण पितृ ऋण और आचार्य ऋण । यह आचार्य वाला ऋण तब तक नहीं उतरता जब तक अपनी सीखी हुई विद्या आप किसी को सिखा नहीं देते । ख़ैर विद्या दान करते हुए भी पात्रता का सदैव ध्यान रखना रखना चाहिये । कुपात्र को दी गई विद्या नाशकारी भी हो सकती है ।...


नयी दिल्ली/खनऊ।
न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भातृभाज्यं न च भारकारी । व्ययेकृते वर्द्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्व धनप्रधानम् । बचपन से यह श्लोक विद्यालय की दीवाल पर लिखा हुआ पढ़ता आया हूँ । चुनाव ड्यूटी में भी प्राथमिक शालाओं में जाना हुआ है तो विद्यारूपी धन की शाश्वत अनश्वरता दर्शाता यह श्लोक अब भी दीवारों की शोभा बढ़ाता दिखाई देता है। चाणक्य का कहना था कि धन की रक्षा चोरों और राजपुरुषों से करनी चाहिये । आपके पास धन है इसका पता लगते ही चोर और राजा दोनों ही सक्रिय हो जाते हैं और येन केन प्रकारेण सेंध लगा कर या शुल्क लगा कर धन छीनने का पूरा प्रयास करते हैं । लेकिन इस श्लोक में चोर और राजपुरुष के समकक्ष भाई को भी खड़ा कर दिया गया है । यानी विद्या ऐसा घन है जिसे न चोर चुरा सकता है न राजा अपहरण कर सकता है और न भाई बाँट सकता है । न ही इस धन में इतना भार होता है कि थक कर कहीं रख दें । सबसे बड़ी बात कि खर्च करने पर यह धन नष्ट होने की बजाय बढ़ता ही है । बहुत से मित्रों के पास कतिपय विषयों पर बहुत गहन अध्ययन है मगर पूछने पर भी नहीं बताते । मुझे लगता है कि विद्या का निरंतर उपयोग न करने से वह नष्ट हो जाती है । यज्ञोपवीत के सूत्र तीन ऋणों के द्योतक हैं जो आदमी पर जीवन भर सवार रहते हैं । मातृ ऋण पितृ ऋण और आचार्य ऋण । यह आचार्य वाला ऋण तब तक नहीं उतरता जब तक अपनी सीखी हुई विद्या आप किसी को सिखा नहीं देते । ख़ैर विद्या दान करते हुए भी पात्रता का सदैव ध्यान रखना रखना चाहिये । कुपात्र को दी गई विद्या नाशकारी भी हो सकती है ।...


नयी दिल्ली/खनऊ।
न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भातृभाज्यं न च भारकारी । व्ययेकृते वर्द्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्व धनप्रधानम् । बचपन से यह श्लोक विद्यालय की दीवाल पर लिखा हुआ पढ़ता आया हूँ । चुनाव ड्यूटी में भी प्राथमिक शालाओं में जाना हुआ है तो विद्यारूपी धन की शाश्वत अनश्वरता दर्शाता यह श्लोक अब भी दीवारों की शोभा बढ़ाता दिखाई देता है। चाणक्य का कहना था कि धन की रक्षा चोरों और राजपुरुषों से करनी चाहिये । आपके पास धन है इसका पता लगते ही चोर और राजा दोनों ही सक्रिय हो जाते हैं और येन केन प्रकारेण सेंध लगा कर या शुल्क लगा कर धन छीनने का पूरा प्रयास करते हैं । लेकिन इस श्लोक में चोर और राजपुरुष के समकक्ष भाई को भी खड़ा कर दिया गया है । यानी विद्या ऐसा घन है जिसे न चोर चुरा सकता है न राजा अपहरण कर सकता है और न भाई बाँट सकता है । न ही इस धन में इतना भार होता है कि थक कर कहीं रख दें । सबसे बड़ी बात कि खर्च करने पर यह धन नष्ट होने की बजाय बढ़ता ही है । बहुत से मित्रों के पास कतिपय विषयों पर बहुत गहन अध्ययन है मगर पूछने पर भी नहीं बताते । मुझे लगता है कि विद्या का निरंतर उपयोग न करने से वह नष्ट हो जाती है । यज्ञोपवीत के सूत्र तीन ऋणों के द्योतक हैं जो आदमी पर जीवन भर सवार रहते हैं । मातृ ऋण पितृ ऋण और आचार्य ऋण । यह आचार्य वाला ऋण तब तक नहीं उतरता जब तक अपनी सीखी हुई विद्या आप किसी को सिखा नहीं देते । ख़ैर विद्या दान करते हुए भी पात्रता का सदैव ध्यान रखना रखना चाहिये । कुपात्र को दी गई विद्या नाशकारी भी हो सकती है ।...