बैजनाथ धाम।
27 सितंबर 1953 भारत के इतिहास का एक ऐतिहासिक दिन। उस दिन तत्कालीन बिहार और आज के झारखंड स्थित वैद्यनाथ धाम मंदिर में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबू श्री कृष्ण सिंह ने स्वयं अपनी अगुवाई में मंदिर के कपाट हरिजन भाइयों के लिए खुलवा दिए थे। प्रभावशाली जमींदार जाति से आने वाले श्री बाबू के इस पुण्य कार्य को भुला दिया गया है और उनकी जाति को दबंग और अत्याचारी घोषित करने का षड्यंत्र चलाया जा रहा है जबकि इतिहास गवाह है कि यह जाति समतामूलक समाज की स्थापना के लिए सदैव प्रयासरत रही है,वह समाज की पोषक रही है शोषक नहीं। श्री बाबू भूमिहार ना होकर अगर दलित होते तो यह दिवस ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा होता, पर हाय रे दुर्भाग्य ! (खबर के साथ लगा चित्र मंदिर प्रवेश का है )..साभार ...


मोकामा/पटना।
दिनांक 30/08/2018 गुरूवार, मोकामा, पटना,बिहार को SC/ST Act में नये प्रावधानों को लेकर जगह जगह लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक यह एक काला कानून है,जिसका विरोध आवश्यक है।इस काले कानून को तुरंत समाप्त किया जाना देश एवं जन हित में आवश्यक है।...


पटना।
--उच्च शिक्षा में सुधार हुआ तो राज्यपाल का उपकार मानेगा बिहार-- निवत्र्तमान राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बिहार की अस्त- व्यस्त उच्च शिक्षा में सुधार की ठोस पहल शुरू कर दी थी। इसी बीच उनका तबादला हो गया।उम्मीद है कि मौजूदा राज्यपाल सह विश्व विद्यालयों के चांसलर लाल जी टंडन उस काम को आगे बढ़ाएंगे। काम तो जरा कठिन है,पर यदि महामहिम उच्च शिक्षा को पटरी पर ला सके तो यह बिहार पर उनका एक बड़ा उपकार माना जाएगा। उत्तर प्रदेश मूल के किसी हस्ती के लिए इस बिहार राज्य की उच्च शिक्षा की दुर्दशा को समझना आसान है ।क्योंकि मिल रही सूचनाओं के अनुसार लगभग ऐसे ही हालात उत्तर प्रदेश के भी हैं। बिहार में भी शिक्षण और परीक्षा में प्रामाणिकता कायम करने की सख्त जरूरत है। अनेक स्तरों पर शिक्षा माफिया सक्रिय हैं।उनको सही मुकाम पर पहुंचाने का काम कठिन है।हालांकि यह काम असंभव नहीं है।पर जो भी हो,उसे तो करना ही पड़ेगा ताकि अगली पीढि़यां हमंे दोष न दें। चूंकि उच्च शिक्षा के मामले में चांसलर को अधिक अधिकार मिले हुए हैं,इसलिए उनका इस्तेमाल करके ही इसे सुधारा जा सकेगा। नये महा महिम से यह उम्मीद की जा रही है। बिहार की उच्च शिक्षा की बर्बादी का एक पिछला नमूना पेश है। सन 2009 से 2013 तक देवानंद कुंवर बिहार के राज्यपाल सह चांसलर थे। एक बार जब राज्यपाल कुंवर विधान मंडल की संयुक्त बैठक को संबांधित करने पहुंचे तो कांग्रेस की एम.एल.सी.ज्योति ने उनसे सवाल कर दिया,‘आजकल वी.सी.की बहाली का क्या रेट चल रहा है आपके यहां ?’ खैर, उस हालात से तो बिहार अब उबर चुका है,पर अभी बहुत कुछ करना बाकी है। --शिक्षा माफिया की ताकत-- यह पक्की खबर है कि सत्यपाल मलिक को कश्मीर का राज्यपाल इसलिए बनाया गया क्योंकि वह इस पद के लिए सर्वाधिक योग्य व्यक्ति माने गये। पूर्व राज्यपाल विद्या सागर राव,पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि,सत्यपाल मलिक ,एडमिरल शेखर सिन्हा और भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना में से किन्हीं एक को चुनना था। उस कठिन तैनाती के लिए सबसे योग्य बिहार के राज्यपाल को माना गया। पर बिहार से उनके हटने को लेकर यहां एक अफवाह उड़ चली।वह यह कि शिक्षा माफिया ने उन्हें यहां से हटवा दिया। यह बेसिरपैर की अफवाह है। पर,इस अफवाह के पीछे भी एक खबर है।वह यह कि लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि शिक्षा माफिया इतने अधिक ताकतवर हैं कि वे अपने स्वार्थ में आकर किसी राज्यपाल का भी तबादला करवा सकते हैं। ऐसे में तो उन माफियाओं को उनके असली मुकाम तक पहुंचाने का काम और भी जरूरी है ताकि इस गरीब राज्य के छात्र-छात्राओं के लिए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था की जा सके। अब तक जो खबरें मिलती रही हैं ,उनके अनुसार शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में मुख्य मंत्री नीतीश कुमार हमेशा चांसलर का सहयोग करते आए हैं।इसलिए लगता है कि नये महा महिम को शिक्षा में सुधार का श्रेय मिलने ही वाला है। वैसे भी जो माफिया तत्व आम जन का जितना अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं,उनसे लड़ने की जरूरत उतनी अधिक महसूस की जानी चाहिए। @ मेरे काॅलम ‘कानोंकान’ से@...


मुजफ्फरपुर ।
एक कैंपस के भीतर 29 बच्चियों के साथ बलात्कार होता रहा, बिहार सोता रहा बिहार के मुज़फ्फरपुर में एक बालिका गृह है। इसे चलाते हैं एन जी ओ और सरकार पैसे देती है। इस बालिका गृह में भागी भटकी हुई लड़कियों को ला कर रखा जाता है, जिनका कोई ठिकाना नहीं होता है, मां बाप नहीं होते हैं। इस बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों की उम्र 7 से 15 साल के बीच बताई जाती है। टाटा इस्टिट्यूट ऑफ साइंस जैसी संस्था ने इस बालिका गृह का सोशल ऑडिट किया था जिसमें कुछ लड़कियों ने यौन शोषण की शिकायत की थी। उसके बाद से 28 मई को एफ आई आर दर्ज हुआ और कशिश न्यूज़ चैनल ने इस ख़बर को विस्तार से कवर किया। यहां रहने वाली 42 बच्चियों में से 29 के साथ बलात्कार और लगातार यौन शोषण के मामले की पुष्टि हो चुकी है। एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार का नेटवर्क एक्सपोज़ हुआ हो और अभी तक मुख्य आरोपी का चेहरा किसी ने नहीं देखा है। पुलिस की कार्रवाई चल रही है मगर उसी तरह चल रही है जैसे चलती है। मई से जुलाई आ गया और पुलिस मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर को रिमांड पर नहीं ले सकी। इस मामले को शिद्दत से कवर करने वाले संतोष सिंह को राजधानी पटना की मीडिया की चुप्पी बेचैन कर रही है। वे हर तरह से समझना चाहते हैं कि एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार का एक पूरा नेटवर्क सामने आया है जिसमें राजनीतिक, न्यायपालिका, नौकरशाही और पत्रकारिता सब धुल मिट्टी की तरह लोट रहे हैं फिर भी मीडिया अपनी ताकत नहीं लगा रहा है। रिपोर्टर काम नहीं कर रहे हैं। संतोष को लगता है कि पूरा तंत्र बलात्कारी के साथ खड़ा है। इस मामले को लेकर विधानसभा और लोकसभा में हंगामा हुआ है मगर रस्मे अदाएगी के बाद सबकुछ वहीं है। ख़बर की पड़ताल ठप्प है तब भी जब 11 में से 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। "जिस बालिका गृह में 42 में से 29 लड़कियों के साथ रेप हुआ हो, यह कैसे संभव है कि वहां हर महीने जांच के लिए जाने वाले एडिशनल ज़िला जज के दौरे के बाद भी मामला सामने नहीं आ सका। बालिका गृह के रजिस्टर में दर्ज है कि न्याययिक अधिकारी भी आते थे और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी के लिए भी सप्ताह में एक दिन आना अनिनार्य हैं ।" यह हिस्सा संतोष सिंह के पोस्ट का है। संतोष ने लिखा है कि बालिका गृह की देखरेख के लिए पूरी व्यवस्था बनी हुई है। समाज कल्याण विभाग के पांच अधिकारी होते हैं, वकील होते हैं, समाजिक कार्य से जुड़े लोग होते हैं। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की निगरानी के बाद भी 29 बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है।आप जानते हैं कि हाईकोर्ट के अधीन राज्य विधिक आयोग होता है जिसके मुखिया हाईकोर्ट के ही रिटायर जज होते हैं । बालिका गृहों की देखरेख की जिम्मेवारी इनकी भी होती है। मामला सामने आते ही उसी दिन राज्य विधिक आयोग कि टीम बालिका गृह पहुंची। उसकी रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है। संतोष सिंह ने लिखा है कि बालिका गृह को चलाने वाला ब्रजेश ठाकुर पत्रकार भी रहा है और पत्रकारों के नेटवर्क में उसकी पैठ है। संतोष समझना चाहते हैं कि क्या इस वजह से मीडिया में चुप्पी है। बिहार के अख़बारों और चैनलों ने इस ख़बर को प्रमुखता नहीं दी। ज़िला संस्करण में ख़बर छपती रही मगर राजधानी पटना तक नहीं पहुंची और दिल्ली को तो पता ही नहीं चला। ब्रजेश ठाकुर के कई रिश्तेदार किसी न किसी चैनल से जुड़े हैं। ब्रजेश ठाकुर गिरफ्तार भी हुआ मगर तीसरे दिन बीमारी के नाम पर अस्पताल पहुंच गया। अस्पताल से ही फोन करने लगा तो बात ज़ाहिर हो गई। पुलिस को वापस जेल भेजना पड़ा। ब्रजेश ठाकुर के परिवार वालों का कहना है कि रिपोर्ट में उनका नाम इसलिए आया कि उन्होंने पैसा नहीं दिया। न ही समाज कल्याण विभाग के एफ आई आर में उनका नाम है। किसी का भी नाम नहीं है। फिर उन्हें निशाना क्यों बनाया जा रहा है।इस बात की तो पुष्टि हो ही चुकी है कि 29 बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है। यह रिपोर्ट तो झूठी नहीं है। ब्रजेश ठाकुर दोषी है या नहीं, यह एक अलग सवाल है मगर जांच नहीं होगी तो पता कैसे चलेगा। जांच कैसे हो रही है, इस पर नज़र नहीं रखी जाएगी तो जांच कैसी होगी, आप समझ सकते हैं। सबके हित में है कि जांच सही से हो। संतोष सिंह ने ब्रजेश ठाकुर के रिमांड न मिलने पर भी हैरानी जताई है। " ऐसा पहला केस देखने को मिला है जिसमें पुलिस ब्रजेश ठाकुर से पुछताछ के लिए रिमांड का आवेदन देती है लेकिन कोर्ट ने रिमांड की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने दोबारा रिमांड का आवेदन किया तो कोर्ट ने कहा कि जेल में ही पूछताछ कीजिए । बाद में पुलिस ने कहां कि जेल में ब्रजेश ठाकुर पुछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं,, दो माह होने को है अभी तक पुलिस को रिम...


पटना।
रेणुका चौधरी का अनुभव और कांग्रेस का चरित्र :- साल था 1952 । बिहार की स्वतंत्रता सेनानी तारकेश्वरी सिन्हा पटना से लोकसभा सांसद चुनकर दिल्ली पहुंची ।भारत बेहद पिछड़ा लेकिन तारकेश्वरी जी एकदम आधुनिक । बला की खूबसूरत। चेहरे पर एक चार्म। बॉब कट बाल, साड़ी और स्लिवलेस ब्लाउज। वह जहां खड़ी हो जाती थीं, वहां का माहौल ही बदल जाता था। सांसद क्या और मंत्री क्या ? सभी के बीच उन्हें लेकर खास दीवानगी थी । उन्हें ग्लैमरस गर्ल ऑफ पार्लियामेंट कहा जाता था । चटकीले नेहरू की वे खास पसंद थी । प्रधानमंत्री आवास में तारकेश्वरी जी का नियमित आना जाना था । नेहरू जी के उस जमाने मे 2 खास आदमी हुआ करते थे । एक मोहम्मद यूसुफ , दूसरे मथाई । दोनों ही परले दर्जे के आशिकमिजाज । कुछ लोग संजय गांधी में यूसुफ DNA होने का दावा भी करते हैं लेकिन वो चर्चा फिर कभी। लेकिन जिस बात को मैं गारंटी के साथ बता रहा हूं वह तारकेश्वरी सिन्हा की स्वीकारोक्ति पर टिकी है । तारकेश्वरी सिन्हा के अनुसार एक बार प्रधानमंत्री आवास की सीढ़ीयां चढ़ रही थी कि मोहम्मद युसुफ ने उन्हें झटके से अपने कमरे में खींच लिया। इस बात की शिकायत जब तारकेश्वरी जी ने नेहरू से की तो नेहरू जी मुस्कुरा कर रह गए । असल मे तारकेश्वरी जी की नजदीकियां नेहरू के दामाद फिरोज खान गांधी से भी थी । यानी ससुर और दामाद दोनों की 'नजदीकी' थी वो । अतः यूसुफ और मथाई जैसे चंगु-मंगू को क्यों मुंह लगाती?यही बात उन दोनों को बुरी लगती। वे तारकेश्वरी जी को मोलेस्ट करने का कोई मौका नही चूकते थे । दिल्ली में रायसीना रोड पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की भव्य बिल्डिंग है । एक जमाने में वह फिरोज़ गांधी का सरकारी आवास था। तारकेश्वरी को अक्सर वहां भी देखा जाता था । एक बार रात नौ बजे के करीब इंदिरा वहां आईं और उन्होंने कमरे में किसी महिला के कपड़े देखे । इंदिरा गुस्से में तमतमा के वंहा से निकल गयी । इंदिरा का अंदाज़ा था कि ये कपड़े तारकेश्वरी के हैं। इसके बाद ताजिंदगी इंदिरा, तारकेश्वरी से नफरत करती रही। खैर बाद में तारकेश्वरी जी नेहरू कैबिनेट में डिप्टी वित्त मंत्री भी बनीं।कहा जाता है मोरारजी देसाई, नेहरू और सिन्हा जी का त्रिकोणीय संबंध तारकेश्वरी को अवसाद और नींद की गोलियां खाकर बेसुध होने तक पहुंच गया । जब तारकेश्वरी नींद की गोलियां खाने के बाद अस्पताल में भर्ती हुई थी तो मोरारजी देसाई पूरी रात बेचैनी में अस्पताल में टहलते रहे । नेहरू, तारकेश्वरी, मोरारजी, युसुफ, इंदिरा, फिरोज और हम्मी के संबंध आपस में इस तरह अंतरंग और उलझे थे कि उसका असर कांग्रेस की विभाजन तक का कारण बन गया था । अतः लोग यह कहते है कि कांग्रेस के बुनियादी ढांचे में एक ईंट "सेक्स" का भी रहा है । ए ओ ह्यूम उसके अंग्रेज सहकर्मी और मोतीलाल नेहरू के बीच संबंधों में रासरंग के अहम योगदान से शुरू होकर वर्तमान में रेणुका चौधरी की बलात्कार की स्वीकारोक्ति तक कांग्रेस की बुनावट सेक्स के चरखे से हुई है, इस बात को नकार नहीं सकते। कांग्रेसी ब्रह्मचर्य की संपुष्टि से लेकर जज बनाने तक के लिए वात्स्यायन-सूत्र का प्रयोग करते हैं , यह जगजाहिर ही है । तो कांग्रेस की नेत्री रेणुका चौधरी ने 2 दिन पूर्व जो बयान दिया कि संसद में भी कास्टिंग काऊच होता है वह सही है । कांग्रेस के इतिहास की स्वीकारोक्ति है ।...